US Iran Israel War: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा। जयराम रमेश ने भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए।
US Pakistan Relation: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की खबरों ने भारत की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आज (सोमवार) को कहा कि भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति में बड़े बदलाव की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी इस दिशा में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका है कि आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि जिस देश को भारत के विदेश मंत्री ने कभी दलाल कहा था, वही अब अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है।
कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में उसने सऊदी अरब और कतर से करीब 6 अरब डॉलर का कर्ज लिया है। इसका इस्तेमाल उसने अपने पुराने कर्ज चुकाने और यूरोबॉन्ड की किस्त भरने में किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भले ही कमजोर हो, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सक्रिय बना हुआ है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की कूटनीति पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों के बाद भारत ने जो अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल किया था, वह अब कमजोर पड़ता दिख रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अमेरिका में बढ़ती स्वीकार्यता भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के राजनीतिक और व्यावसायिक नेटवर्क में भारत से बेहतर पकड़ बनाई है।
अपने बयान के अंत में जयराम रमेश ने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति और कूटनीतिक तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव करना होगा। उन्होंने दोहराया कि मौजूदा नेतृत्व इस चुनौती से निपटने में सक्षम नहीं दिख रहा है।