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बिहार में ‘नई नियमावली’ पर भड़का गुस्सा, पटना में सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी, पुलिस से तीखी झड़प के बाद बैरिकेडिंग तोड़ी

Student Protest: बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती की नई नियमावली 2026 के विरोध में अभ्यर्थियों ने पटना की सड़कों पर जमकर हंगामा किया। बेली रोड पर पुलिस से झड़प और बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पढ़ें पूरी खबर...
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Aug 22, 2026
Bihar Phd Research Scholar Protest, Beli Road Patna Traffic Jam
लोकभवन मार्च के दौरान पुलिस से भिड़े असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थी (फोटो सोर्स- ANI)

Student Protest in Bihar: पटना में उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब 'ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार' के बैनर तले सैकड़ों अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। गर्दनीबाग से शुरू हुआ अभ्यर्थियों का लोकभवन मार्च बेली रोड पहुंचते ही काफी उग्र हो गया। पुलिस ने जगह-जगह जो रास्ते बंद करने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे, उन्हें गुस्साए छात्रों ने धक्का देकर तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और तीखी झड़प हुई। इस हंगामे की वजह से बेली रोड पर बहुत लंबा जाम लग गया और लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

19 दिनों से भूख हड़ताल, दो छात्रों की बिगड़ी तबीयत

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. कुंदन कुमार ने बताया कि छात्र पिछले 19 दिनों से लगातार अपनी मांगों को लेकर बिना खाए-पीए भूख हड़ताल पर बैठे हैं। कड़कड़ाती धूप और लगातार अनशन की वजह से दो छात्रों की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद भी जब सरकार या प्रशासन की तरफ से बात करने कोई नहीं आया, तो दुखी होकर छात्रों को लोकभवन की तरफ मार्च निकालना पड़ा।

क्यों हो रहा है नई नियमावली का विरोध?

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि बिहार सरकार की नई सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली 2026 छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनका कहना है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में पिछले 30 सालों में सिर्फ तीन बार ही पक्की भर्तियां हुई हैं। ऐसे में अब पक्की नौकरी की जगह संविदा यानी कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती करना बिल्कुल गलत है। छात्रों की मांग है कि पुरानी व्यवस्था की तरह UGC के नियमों (टेबल 3A) के हिसाब से ही पक्की नौकरियां दी जाएं।

छात्र नियमावली में हुए कुछ और बदलावों से भी बहुत नाराज हैं। नई नियमावली के तहत अधिकतम आयु सीमा को 55 वर्ष से घटाकर सीधा 40 वर्ष कर दिया गया है। इससे सालों से विश्वविद्यालयों में अतिथि शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी अभ्यर्थियों के सामने रोजगार का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसलिए अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि उम्र सीमा को वापस 55 वर्ष ही रखा जाए। इसके अलावा पहले UGC टेबल 3A के तहत रिसर्च पब्लिकेशन के लिए मिलने वाले 10 अंकों को भी इस बार हटा दिया गया है, जिसे तुरंत वापस जोड़ने और बिहार के अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की मांग उठाई जा रही है।

सांसद पप्पू यादव पहुंचे समर्थन में, बोले- छात्रों की बात सुने सरकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद पप्पू यादव ने भी गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचकर अभ्यर्थियों की मांगों का पूरा समर्थन किया। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शोधार्थी देश और प्रदेश के ज्ञान की मजबूत रीढ़ हैं। सरकार को उनकी जायज मांगों को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए और तुरंत वार्ता कर समस्या का हल खोजना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि शोधार्थियों के हक और सम्मान की इस लड़ाई में वे आखिरी दम तक उनके साथ खड़े रहेंगे।

Updated on:
22 Aug 2026 02:09 pm
Published on:
22 Aug 2026 01:47 pm