
Punjab Govt Employees Mass Casual Leave: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और भगवंत मान सरकार के बीच टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाने की घोषणा के बीच सरकार ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने साफ किया कि सार्वजनिक सेवाओं में बाधा पहुंचने की स्थिति में सरकार कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर अब भी अड़े हुए हैं।
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के प्रस्तावित सामूहिक अवकाश (Punjab Employees Strike 2026) को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ गया है। पंजाब संजा मुलाजिम मंच ने पहले ही ऐलान किया था कि यदि सरकार 7 सितंबर तक कर्मचारियों के खिलाफ जारी नोटिस वापस नहीं लेती है तो 8 सितंबर को कर्मचारी मास कैजुअल लीव पर जाएंगे।
सरकार ने इस कदम को स्वीकार करने के बजाय इसे अवैध हड़ताल करार दिया है। उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने सोमवार शाम कहा कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति से यदि आम लोगों को परेशानी होती है या जरूरी सरकारी सेवाएं प्रभावित होती हैं तो सरकार कानून के तहत आवश्यक कदम उठाएगी।
मंत्री के मुताबिक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ता यानी डीए का मुद्दा सबसे अहम है। सरकार का कहना है कि 17 जुलाई 2020 के बाद नियुक्त करीब 85 हजार कर्मचारियों के लिए डीए को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया जा चुका है। ये कर्मचारी सातवें वेतन आयोग के केंद्रीय पैटर्न के अनुरूप वेतन व्यवस्था में आते हैं।
हालांकि, इस फैसले का लाभ 17 जुलाई 2020 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। यही अंतर कर्मचारी संगठनों के असंतोष की बड़ी वजह बना हुआ है। कर्मचारियों की ओर से लंबित 18 प्रतिशत डीए समेत अन्य बकाया मांगों को लेकर पहले भी राज्यव्यापी आंदोलन हो चुका है।
गौरतलब है कि 27 अगस्त को तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर गए थे। इसके बाद सरकार ने उन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की, जिन्हें उस दिन कथित तौर पर अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाया गया।
विवाद का एक बड़ा हिस्सा अब न्यायिक प्रक्रिया से भी जुड़ गया है। डीए और डीआर के बकाये का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित डीए/डीआर भुगतान का निर्देश दिया था। सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये का इतनी कम अवधि में भुगतान करना राज्य की वित्तीय स्थिति और संवैधानिक व्यवस्थाओं के लिहाज से संभव नहीं है।
अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं कर रही, लेकिन पंजाब के आम नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कर्मचारी संगठनों से राजनीतिक प्रभाव से दूर रहकर उचित मंच पर अपनी मांगें रखने का आग्रह किया।