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Satya Niketan हादसे पर भड़के कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त, बोले- भाजपा सरकार पर बिल्डिंग माफिया का दबाव

Satya Niketan Incident: सत्य निकेतन हादसे पर कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने भाजपा सरकार और सीएम रेखा गुप्ता पर बिल्डिंग माफिया के दबाव का आरोप लगाया। सेक्शन 56जे के तहत कार्रवाई और खतरनाक बिल्डिंग्स पर त्वरित कदम की मांग।
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Delhi police FIR, building renovation negligence

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसे के बाद का खौफनाक मंजर (फोटो सोर्स- IANS)

Satya Niketan Incident 2026: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार की कार्रवाई पर कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिल्ली की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बिल्डिंग माफिया के दबाव का आरोप लगाया और सेक्शन 56जे के तहत कमिश्नर समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

बिल्डिंग माफिया का बड़ा दबाव

कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार पर बहुत बिल्डिंग माफिया का बड़ा दबाव है कि वो अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन ना लें। मात्र सस्पेंड करने से कुछ नहीं होता। ये अधिकारी दो महीने में फिर वापस अपनी नौकरी पर, इससे अच्छे पद पर आ जाएंगे। सेक्शन 56जे के तहत कमिश्नर समेत इन सभी भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से निलंबित करना चाहिए। कल उन्हीं की पार्टी के लोग दिल्ली की जनता को गुमराह करने के लिए कमिश्नर को हटाने की मांग कर रहे थे।

कमिश्नर को नौकरी से निकालना चाहिए

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को तुरंत 56J के तहत कमिश्नर डीसी को नौकरी से निकालना चाहिए ताकि अगली बार कोई भी अधिकारी, नेताओं या किसी बिल्डर के दबाव में आकर इतनी बड़ी दुर्घटना को न होने दे। दूसरी चीज, जब कांग्रेस की 1984 में देश में सरकार थी, 1985 में तत्कालीन सरकार दिल्ली के लिए सेक्शन 466ए के तहत एक बहुत बड़ा कानून लेकर आई थी। इसके अंदर कोई भी व्यक्ति जो दिल्ली में गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन करता था, उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और जेल भेजने का प्रावधान था।

बिल्डर्स को बचाने के लिए सरकार ने अपना हथकंडा

कांग्रेस नेता संजय दत्त ने कहा कि अभी जो जनविश्वास बिल, केंद्र सरकार लेकर आई है, उसमें से सेक्शन 466A को हटा दिया है, यानी कि उन लोगों पर कोई भी आपराधिक मामला नहीं बन सकता। इस सरकार ने बिल्डरों को संरक्षण देने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया। इतनी ही कोशिश, अगर ये दिल्ली की बिल्डिंग्स को बचाने में करते, तो इस तरीके से हादसे दिल्ली में नहीं होते।

क्या दिल्ली में इस समय मात्र 19 बिल्डिंग ही खतरनाक?

सरकारी आंकड़ा कहता है कि दिल्ली में इस समय मात्र 19 बिल्डिंग ही खतरनाक हैं। यानी कि अधिकारियों पर बिल्डर्स, नेताओं और इन्हीं के विभाग के लोगों का दबाव है, ताकि ये खतरनाक बिल्डिंग को चिन्हित ना करें। तुरंत दिल्ली के अंदर डोर टू डोर सर्वे होना चाहिए, जितनी भी खतरनाक बिल्डिंग्स हैं, उनकी सूची को नगर निगम की वेबसाइट में डालना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति जो दिल्ली में आकर इन घरों को किराए पर लेना चाहता है, वो जाकर देख सकता है कि ये बिल्डिंग खतरनाक है या नहीं।

खतरनाक बिल्डिंग्स पर हो त्वरित कार्रवाई

उन्होंने आगे कहा कि जितनी भी चिन्हित बिल्डिंग खतरनाक हैं, उनके बिजली-पानी के कनेक्शन तब तक के लिए काट दें, जब तक वो उसे ठीक ना करा दें। जबतक हमारा टेक्निकल सर्वेयर हरी झंडी नहीं दिखाता, तब तक वहां लोगों को रहने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। ये समस्या केवल हॉस्टल तक नहीं है, दिल्ली की ट्रांसपोर्टेशन को लेकर भी है। जब मैं दिल्ली में छात्रों से बात करता हूं, वो ये कहते हैं कि दिल्ली में बसें भी नहीं हैं। अगर हम कहीं और जाकर भी रहें, तो आने की परिवहन व्यवस्था हमारे यहां नहीं है। दिल्ली मेट्रो बहुत ज्यादा महंगी है, तो स्टूडेंट्स कॉलेजों के आसपास घर देखते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल बनाने का वादा स्वयं भारतीय जनता पार्टी का था, उन्होंने हॉस्टल नहीं बनाए।