
चिनाब ब्रिज से गुजरती वंदे भारत ट्रेन (photo - patrika)
नीचे गहरी घाटी में बहती चिनाब नदी… दोनों तरफ आसमान छूते पहाड़ और इनके बीच हवा में टिका स्टील का विशाल पुल। जैसे ही ट्रेन इस पुल से गुजरती है, नीचे से देखने वालों को लगता है मानो ट्रेन पहाड़ों के बीच हवा में दौड़ रही हो। यह है जम्मू-कश्मीर के रियासी में बना चिनाब रेलवे ब्रिज, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज होने का गौरव हासिल है।
नदी तल से करीब 359 मीटर की ऊंचाई पर बना यह पुल दिल्ली की कुतुब मीनार और पेरिस के एफिल टावर से भी ऊंचा है। करीब 1.3 किलोमीटर लंबा यह पुल आधुनिक इंजीनियरिंग का ऐसा नमूना है, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा है।
चिनाब ब्रिज का निर्माण ऐसी जगह हुआ, जहां सीधी और समतल जमीन लगभग नहीं थी। गहरी घाटी, ऊंचे पहाड़, तेज हवाएं और भूकंपीय गतिविधियों की आशंका ने निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाया। पुल की डिजाइन और इंजीनियरिंग में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल हुआ। फिनलैंड और जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता ने इसके डिजाइन और इंजीनियरिंग में योगदान दिया, जबकि भारतीय इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों ने इसे जमीन पर साकार किया। पुल को क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी डिजाइन लाइफ 120 साल रखी गई है। तेज हवाओं और भूकंप जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष इंजीनियरिंग प्रावधान किए गए हैं।
रेलवे अधिकारी के मुताबिक चिनाब ब्रिज अभी एकल रेल लाइन के रूप में काम करता है। इसके कारण परिचालन की कुछ परिस्थितियों में ट्रेनों को आगे या पीछे निर्धारित स्थान पर रोककर दूसरी ट्रेन को रास्ता देना पड़ता है। रेलवे अब पुल पर एक अतिरिक्त रेल लाइन-लेन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे इस मार्ग की रेल क्षमता बढ़ाने और परिचालन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
चिनाब ब्रिज केवल एक ऊंचा पुल नहीं है। यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए कश्मीर घाटी को देश के व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने का सपना साकार हुआ है। चिनाब के ऊपर खड़ा यह विशाल पुल बताता है कि जब इंजीनियरिंग पहाड़ों की चुनौती स्वीकार करती है तो रास्ते केवल जमीन पर नहीं, आसमान के बीच भी बनाए जा सकते हैं। नीचे बहती नदी और ऊपर दौड़ती ट्रेन के बीच खड़ा चिनाब ब्रिज आज भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता का एक अद्भुत प्रतीक बन चुका है।
Updated on:
8 Sep 2026, 1:46 AM IST
Published on:
8 Sep 2026, 1:45 AM IST
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