
दिल्ली के PG हादसे ने परिवार से छीन लिया बेटा (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Delhi Building Collapse: 'हमने तो अभी रक्षाबंधन पर उसे हंसते-खेलते देखा था। बड़े शहर में बड़े सपने लेकर गया था, लेकिन अब हमें उसकी लाश देखनी पड़ रही है…' यह दर्दनाक दास्तान उस बदनसीब पिता की है, जिसने दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए भयंकर हादसे में अपने 18 साल के मासूम बेटे को खो दिया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को लड़कों का एक पांच मंजिला PG अचानक गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में पढ़ने वाले 5 छात्रों और 2 मजदूरों समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज AIIMS और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुआ। इस घटना ने दिल्ली में बिना जांच-पड़ताल के चल रहे PG और कमजोर इमारतों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे में जान गंवाने वाले छात्र पढ़ाई में बेहद होनहार थे और अपने परिवारों का सहारा बनने का सपना देख रहे थे।
अर्पित जहाज (18 वर्ष): मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले अर्पित ARSD कॉलेज में दूसरे वर्ष का छात्र था और CA की तैयारी कर रहा था। छुट्टियों के बाद वह हादसे के कुछ घंटे पहले ही दिल्ली लौटा था। परिजनों ने अस्पताल में अर्पित की आंखें दान की, ताकि उनकी वजह से कोई और दुनिया देख सकें।
युवराज सोनी (20 वर्ष): मोतीलाल नेहरू कॉलेज के द्वितीय वर्ष के छात्र युवराज भी CA की पढ़ाई कर रहा था। युवराज के दोस्त आर्यन ने बताया कि वो अभी-अभी इस PG में आया था और इसने उसे हमसे छीन लिया।
अक्षत सिंह यादव (18 वर्ष): कटनी (मध्य प्रदेश) का रहने वाले अक्षत PGDAV कॉलेज में B.Com का छात्र था। परिजनों को अंदाजा भी नहीं था कि जिस PG को वे सुरक्षित समझ रहे थे, वह उनके बेटे के लिए मौत बन जाएगा।
अभिषेक कुमार (20 वर्ष): उत्तर प्रदेश के वाराणसी निवासी अभिषेक मोतीलाल नेहरू कॉलेज में पढ़ता था। मलबे से अचेत अवस्था में निकाले जाने के बाद अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।
पवन कुमार (17 वर्ष): यूपी के औरैया जिले का रहने वाला पवन हादसे का शिकार होने वाले सबसे कम उम्र का छात्र था। वो मोतीलाल नेहरू कॉलेज में B.Sc प्रथम वर्ष में था।
इन छात्रों के अलावा निर्माण कार्य से जुड़े सुरिंदर सिंह (75) और पवन लाल कोरी (30) नाम के दो मजदूरों की भी इस हादसे में जान चली गई।
हादसे में घायल हुए जम्मू निवासी छात्र नितीश चिब ने उस खौफनाक मंजर का जिक्र करते हुए बताया कि इमारत गिरने से ठीक पहले पानी टपकने की आवाज आई थी और देखते ही देखते कमरे की जमीन नीचे धंस गई। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद नितीश को मलबे से बाहर निकाला गया। फिलहाल AIIMS और सफदरजंग अस्पताल में नीरज बावा और असगर अली समेत अन्य घायलों का इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है।
हादसे के बाद मृतक छात्रों के दोस्तों और परिजनों में भारी गुस्सा है। परिजनों का आरोप है कि PG अंदर से काफी जर्जर स्थिति में था और इसमें पहले से संरचनात्मक खामियां थी। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित इस इलाके में सैकड़ों PG चल रहे हैं, जहां सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जाती है। पीड़ितों के परिवारों ने प्रशासन से दोषियों और PG मालिकों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
Updated on:
08 Sept 2026 07:48 am
Published on:
08 Sept 2026 07:46 am
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