Animal Water Crisis Punjab: पंजाब के रोपण में 'वॉटर मैन' के नाम से मशहूर हरपाल सिंह पाली पिछले 15 सालों से शिवालिक के जंगलों में अपने ट्रैक्टर-टैंकर से पानी पहुंचा रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी में नीलगाय, सांभर और मोरों की जान बचाई जा सके।
Harpal Singh Pali Ropar Water Man: यूपी, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के समेत देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। इंसान के साथ बेजुबान जानवर भी तपीश की वजह से परेशान हैं। ऐसे भीषण दौर में, पंजाब के रोपण जिले में एक ऐसा शख्स है जो जानवरों की प्यास बुझाकर उनकी जान बचाने का काम पिछले 15 सालों से कर रहा है। दरअसल, शिवालिक की पहाड़ियों के बीच हर दूसरे दिन एक ट्रैक्टर के द्वारा एक टैंकर पानी लेकर जंंगल में जाता है। ट्रैक्टर का आवाज दूर से ही सुनकर जंगली सूअर, सांभर, नीलगाय और मोर पानी के गड्ढों की तरफ दौड़ने लगते हैं। मानों उन्हें पता होता है कि उनके 'वॉटर मैन' यानी हरपाल सिंह पाली उनके लिए जीवन अमृत लेकर आ चुके हैं।
आपको बता दें कि हरपाल सिंह पाली पिछले 15 सालों से बिना किसी सरकारी मदद के अपने दम पर शिवालिक के जंगलों में रहने वाले सैकड़ों बेजुबान जानवरों की प्यास बुझाकर उनकी जान बचा रहे हैं। हरपाल सिंह कानपुर खुही गांव के रहने वाले हैं। जानवरों को पानी पिलाने के लिए वह सुरज के उगने के पहले उठकर अपने काम में लग जाते हैं। वे अपने ट्रैक्टर-टैंकर के जरिए करीब 5 किलोमीटर के जंगली दायरे में फैले 25 कृत्रिम गड्ढों और कई बरसाती तालाबों को पानी से लबालब करते हैं। गर्मियों के आते ही शिवालिक की पहाड़ियों के प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाते हैं। पानी की तलाश में तड़पते जानवर अक्सर गांवों का रुख करते हैं, जिससे वे इंसानों के गुस्से या शिकारी कुत्तों का शिकार हो जाते हैं। हरपाल सिंह ने जानवरों की इस बेबसी को देखा और तय किया कि वह उन्हें मरने नहीं देंगे। उन्होंने जंगलों के भीतर 15 ऐसे पक्के (कंक्रीट के) गड्ढे बनाए हैं, जो भीषण गर्मी को झेल सकें।
आज के दौर में जहां ईंधन (डीजल) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और टैंकर का रखरखाव महंगा होता जा रहा है, हरपाल सिंह बिना किसी चंदे या डोनेशन के यह काम कर रहे हैं। हरपाल सिंह अपनी जिद और जानवरों की सेवा करने की भाव को लेकर बताते हैं कि उन्होंने इस काम के लिए आज तक किसी से एक रुपया भी नहीं लिया है। वह इस काम का पूरा खर्च अपनी जेब से करते हैं। उनका कहना है कि जानवरों की सेवा करने से उनकी दुआ लगती है और उनका कारोबार और बढ़ता जाता है। इसलिए वे अपनी कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा जानवरों की सेवा करने में लगा देते हैं।
इस नेक काम की शुरुआत दशकों पहले हरपाल के बचपन में ही हो गई थी। जब वे महज 6 साल के थे, तब अपनी मां के साथ मिट्टी के बर्तनों में पानी भरकर गांव के पास एक छोटे से गड्ढे में डालने जाते थे। पानी डालते ही वहां मोरों का झुंड आ जाता था। मां की दी हुई वही सीख और ममता हरपाल के दिल में बैठ गई। बड़े होकर उन्होंने इस सिलसिले को एक बड़े अभियान में बदल दिया।
हरपाल सिंह का यह प्रयास सिर्फ जानवरों की प्यास ही नहीं बुझा रहा, बल्कि पर्यावरण और इंसानी बस्तियों को भी सुरक्षित रख रहा है। दरअसल, रोपण के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) कंवरदीप सिंह ने उनके काम की सराहना करते हुए बताया कि शिवालिक का यह इलाका मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) के प्रति बेहद संवेदनशील है। हरपाल द्वारा बनाए गए गड्ढों और तालाबों से न केवल जानवरों को पानी मिल रहा है, बल्कि वहां की वनस्पति (Vegetation) भी बची हुई है। इसके अलावा, जंगल के अंदर ही पानी मिल जाने के कारण जानवर गांवों की तरफ नहीं भागते, जिससे फसलों का नुकसान और मानव-वन्यजीव टकराव (Human-Wildlife Conflict) काफी हद तक टल जाता है।
हरपाल सिंह के इस दिनचर्या के बीच एक बेहद मार्मिक कहानी यह है कि उन्होंने एक बार एक घायल सांभर (Sambar Deer) की जान बचाई थी, जिससे उनका ऐसा अनोखा रिश्ता बना कि वह सांभर आज भी अक्सर जंगल से निकलकर हरपाल के घर उनसे मिलने आता है। हरपाल कहते हैं, 'वह सांभर जब हमारे घर आता है, तो बिल्कुल परिवार के सदस्य जैसा महसूस होता है।' जहां शिवालिक की पहाड़ियां इस भीषण गर्मी में धूल और सन्नाटे से घिर जाती हैं, वहां हरपाल सिंह पाली के ट्रैक्टर की आवाज इन बेजुबानों के लिए जिंदगी की उम्मीद बनकर गूंजती है।