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अब्दुल रजाक ने कभी बनाया था सेना के लिए बंकर, अब घर पर चला सरकारी बुलडोजर, 80 की उम्र में फिर हुए बेघर

Kashmir migrant family: जम्मू के सिधरा में 80 वर्षीय अब्दुल रजाक का घर बुलडोजर कार्रवाई में ढहा दिया गया। अधिकारियों ने दावा किया है कि यह मकान वन भूमि पर बना हुआ है। कभी सेना के लिए बंकर बनाने वाले रजाक अब परिवार सहित फिर बेघर हो गए हैं।

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house demolished Sidhra area in Jammu

demolised houses in Jammu (Representative Image -IANS)

Jammu Bulldozer Action: भीषण गर्मी के बीच जम्मू में एक बुजुर्ग का परिवार सुर्खियों में है। दरअसल, कभी कश्मीर में सेना के लिए बंकर बनाने का काम करने वाले 80 वर्षीय अब्दुल रजाक आज अपने ही घर के मलबे के सामने बेघर खड़े हैं। जम्मू के सिधरा इलाके में वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई के दौरान उनका घर बुलडोजर से ढहा दिया गया। अधिकारियों का दावा है कि यह मकान वन भूमि पर बना था।

पहली बार आतंकवादियों की वजह से छोड़ा था घर

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुल रजाक और उनकी पत्नी खातून बी के लिए यह पिछले 30 वर्षों में दूसरी बार है जब उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है। मूल रूप से दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग निवासी रज्जाक ने बताया कि 1990 के दशक में आतंकवाद के चरम दौर में उन्होंने सुरक्षा बलों की मदद की थी। उन्होंने सेना को आतंकवादियों की जानकारी देने के साथ-साथ उनके लिए बंकर भी बनाए थे। रज्जाक का कहना है कि उनकी दी गई जानकारी के आधार पर कई आतंकवादी मारे गए थे।

हालांकि जब सेना की टुकड़ी इलाके से चली गई तो आतंकवादी फिर लौट आए। उन पर सुरक्षा बलों का मुखबिर होने का आरोप लगाया गया। परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। आतंकवादियों ने गांव में कई लोगों की हत्या कर दी, जिनमें उनके रिश्तेदार भी शामिल थे। इसके बाद उनका परिवार कश्मीर छोड़कर जम्मू आ गया और वहीं शरण लेने को मजबूर हुआ।

क्यों की गई कार्रवाईः अस्थायी टेंट में गुजार रहा परिवार

रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में सिधरा इलाके में 25 से 30 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। इनमें अधिकतर घर गुर्जर और बकरवाल समुदाय से जुड़े परिवारों के थे। अब्दुल रजाक का परिवार भी उन्हीं प्रभावित लोगों में शामिल है। कार्रवाई के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है और अस्थायी टेंट में दिन गुजार रहा है।

परिवार का कहना है कि उन्हें सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका राशन कार्ड और कई जरूरी दस्तावेज मलबे के नीचे दब गए। रज्जाक और उनका परिवार जम्मू-कश्मीर प्रशासन में पंजीकृत कश्मीरी प्रवासी हैं, जिन्हें सरकार की ओर से राहत और राशन मिलता रहा है।

बुलडोजर की कार्रवाई से राजनीति विवाद शुरू

इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। वन विभाग का कहना है कि जमीन पर अवैध कब्जा था, जबकि जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री जावेद राणा ने दावा किया कि लोग वन भूमि पर नहीं बल्कि सरकारी जमीन पर रह रहे थे। उन्होंने मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।