ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग जारी है। इस भीषण युद्ध में ईरान के करीब 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ईरान-इजरायल युद्ध के बारे में बड़ा दावा किया है। इसके साथ ही राहुल गांधी ने इस जंग से भारत पर आने वाले संकट को लेकर चिंता जाहिर की है।
Rahul Gandhi Big Statement at US Iran-Israel War: लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केरल के कुट्टिक्कानम (इडुक्की) स्थित मारियन कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान राहुल गांधी ने स्टूडेंट्स से देश-विदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। राहुल गांधी ने स्टूडेंट्स से बात करते हुए कहा- मीडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अमेरिका- इजराइल और ईरान के बीच प्रतीत होता है, लेकिन इस जंग का असली खिलाड़ी अमेरिका, चीन और रूस हैं। उन्होंने कहा कि ऊपरी तौर पर यह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जैसा लगता है। असल में यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच का संघर्ष है। अमेरिका अपनी महाशक्ति बने रहने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन धीरे-धीरे उसके करीब आ रहा है। मिडिल ईस्ट ऊर्जा उत्पादन का केंद्र है। मिडिल ईस्ट पर हमारी ऊर्जा निर्भरता के कारण भारत को इसकी सीधी कीमत चुकानी पड़ेगी।
US, ईरान-इजरायल जंग की चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने भारत में ईंधन महंगा होने का दावा किया है। इसके साथ ही देश की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। देश पर आने वाले इस संकट से निपटने के लिए राहुल गांधी ने सतर्क रहने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट पर हमारी ऊर्जा निर्भरता के कारण भारत में ईंधन महंगा होने वाला है। इसके साथ ही भारत की आर्थिक वृद्धि भी धीमी होने वाली है। इसलिए हमें हर कदम पर बहुत सतर्क रहना होगा। एक सप्ताह की लड़ाई के बाद क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति पहले ही बाधित हो चुकी है। भारत को यह समझना होगा कि हम एक हिंसक और खतरनाक दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए भारत को अपनी नीतिगत स्थिति और इस खतरनाक दौर से निपटने के तरीकों को लेकर स्पष्ट होना होगा।
राहुल गांधी ने कहा कि चीन हमारी सीमा पर है और अमेरिका हमारा सहयोगी है। वे युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं। हमें बहुत सावधान रहना होगा कि कहीं हम अचानक इस संघर्ष में न फंस जाएं। राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली वैचारिक हमले की चपेट में है। उन्होंने दावा किया कि कई कुलपतियों की नियुक्ति केवल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(RSS) से उनके संबंधों के कारण की जा रही हैं। शिक्षा व्यवस्था में नियुक्तियां विभाजनकारी एजेंडा को बढ़ावा देने के लिए नहीं की जानी चाहिए। भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली पर वैचारिक हमला हो रहा है।
भारत कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 40% से 50% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। यह तेल मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत से आता है। इसके अलावा भारत करीब 42% तरल प्राकृतिक गैस(LNG) कतर से आयात करता है। इसकी सप्लाई भी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से होती है।