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भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए चीफ होंगे रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ

केंद्र सरकार ने बुधवार यानी 12 जनवरी को वरिष्ठ रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ को भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (ISRO) का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। सोमनाथ तीन साल के लिए अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष रहेंगे।

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Jan 12, 2022
Dr. S.Somanath (ISRO new Chief)

भारत की अंतरिक्ष संस्थान ‘भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन’ (ISRO) के अगले प्रमुख रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ को नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को ये फैसला लिया था। वरिष्ठ रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ ने GSLV Mk-III लॉन्चर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अपने करियर के शुरुआती चरणों के दौरान पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के एकीकरण के लिए एक टीम लीड की थी। अब वे इसरो में वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख के सिवन की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल इसी हफ्ते शुक्रवार को खत्म हो रहा है।

एस सोमनाथ बने तीन साल के लिए अंतरिक्ष विभाग के सचिव:
वरिष्ठ वैज्ञानिक एस सोमनाथ को तीन साल के लिए अंतरिक्ष विभाग के सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया है। वे साथ ही अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष भी रहेंगे। आपको बता दें कि एस सोमनाथ 22 जनवरी, 2018 से विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक का नेतृत्व कर रहे हैं। वह दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक के अगले प्रमुख के रूप में के सिवन का स्थान लेंगे। वे हाई थ्रस्ट सेमी-क्रायोजेनिक इंजन की विकास गतिविधियों के अहम हिस्सा रहे हैं।

ऐसे हुई सोमनाथ के करियर की शुरुआत:
एस सोमनाथ देश के कुछ बेहतरीन वैज्ञानिकों में से एक हैं। सोमनाथ रॉकेट टेक्‍नोलॉजिस्‍ट और एयरोस्‍पेस इंजीनियर हैं। उन्‍हें भारत के सबसे ताकतवर स्पेस रॉकेट (GSLV Mk-III) लॉन्चर के विकास कार्य को लीड करने वाले चंद वैज्ञानिकों में गिना जाता है। उन्‍होंने अपने कॅरियर की शुरुआत पोलर सैटेलाइट लॉन्चिंग व्हीकल (पीएसएलवी) के विकास कार्यों में भी अहम भूमिका निभाई थी।


कबियामी की राह पर यहां से चले थे सोमनाथ:

वरिष्ठ वैज्ञानिक, एस सोमनाथ ने केरल के एर्नाकुलम से महाराजा कॉलेज से प्री-डिग्री प्रोग्राम पूरा करने के बाद केरल विश्वविद्यालय के क्विलॉन स्थित टीकेएम क़ॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करी। इसके बाद उन्‍होंने आईआईएससी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री हासिल हुई। उन्हें रॉकेट डायनेमिक्स और कंट्रोल पर विशेषज्ञता हासिल की उसके बाद वे 1985 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में शामिल हुए।

Updated on:
12 Jan 2022 11:30 pm
Published on:
12 Jan 2022 11:28 pm
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