Best Summer Shayari in Hindi: उफ्फ ये गर्मी! जब शायरों को महबूबाओं और एक्स से ज्यादा मौसम-ए-गरमा ने सताया तो उनके अल्फाजों में भी 'जलन' दिखाई देने पड़ गई। पढ़ें मशहूर शायरों की गर्मी ( Garmi par Shayari ) पर 10 शायरी...
Summer Shayari in Hindi: उफ्फ ये गर्मी! इस गर्मी ने ना सिर्फ आपको और मुझे परेशान कर रखा है बल्कि देश विदेश के मशहूर शायरों को भी जमकर सताया है। तभी तो शायरों को भी अपनी पसंदीदा मौजू (विषय) जैसे कि एक्स या महबूबाओं को छोड़ कर गर्मी पर ही शायरी करनी पड़ गई। नसीर काजमी से लेकर राहत इंदौरी और अकबर इलाहाबादी गर्मी को अलग अलग ढंग से पेश किया है।
शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए
-राहत इंदौरी
गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो
गुल खिले जाते हैं वो साया-ए-तर तो देखो
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
पड़ जाएं मिरे जिस्म पे लाख आबले 'अकबर'
पढ़ कर जो कोई फूंक दे अप्रैल मई जून
-अकबर इलाहाबादी
पिघलते देख के सूरज की गर्मी
अभी मासूम किरनें रो गई हैं
-जालिब नोमानी
गर्मी से मुज़्तरिब था ज़माना ज़मीन पर
भुन जाता था जो गिरता था दाना ज़मीन पर
-मीर अनीस
फिर वही लम्बी दो-पहरें हैं फिर वही दिल की हालत है
बाहर कितना सन्नाटा है अंदर कितनी वहशत है
-ऐतबार साजिद
ये धूप तो हर रुख़ से परेशाँ करेगी
क्यूँ ढूँड रहे हो किसी दीवार का साया
-अतहर नफ़ीस
कुछ अब के धूप का ऐसा मिज़ाज बिगड़ा है
दरख़्त भी तो यहाँ साएबान माँगते हैं
-मंज़ूर हाशमी
लगा आग पानी को दौड़े है तू
ये गर्मी तेरी इस शरारत के बाद
-मीर तक़ी मीर
दश्त-ए-वफ़ा में जल के न रह जाएँ अपने दिल
वो धूप है कि रंग हैं काले पड़े हुए
-होश तिर्मिज़ी