
Shiv Sena (UBT) Crisis: विपक्षी दलों के सांसदों को तोडने की सियासत को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के संपर्क से बाहर होने और एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के ऑपरेशन टाइगर को ऑपरेशन जैकल करार दिया है। उनके बयान ने महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
नागपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, यह ऑपरेशन टाइगर नहीं, ऑपरेशन जैकल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका गठबंधन सत्ता की भूख की आखिरी सीमा तक पहुंच चुका है। यहां दूसरे दलों के चुने हुए प्रतिनिधियों को अपने नियंत्रण में लेकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की जा रही है। पटोले ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की जा रही है और विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए दबाव और लालच दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) सांसदों को लेकर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया था कि सांसदों को खरीदने के लिए 15-15 करोड रुपये एडवांस दिए जा रहे हैं। इस पर नाना पटोले ने कहा, वे इससे भी ज्यादा पैसे दे सकते हैं, क्योंकि इन लोगों ने देश को लूटा है। प्रधानमंत्री मोदी और उनका गठबंधन लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या कर रहे हैं और हम इसकी निंदा करते हैं। पटोले ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष से ज्यादा उम्मीद नहीं है क्योंकि वे वही फैसले लेते हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में स्पीकर की स्वायत्तता भी कमजोर हो चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में बडे राजनीतिक संकट की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के छह से सात लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और दिल्ली में अलग गुट बनाने की तैयारी चल रही है। जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं उनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सांसद पहले लोकसभा में अलग गुट बनाएंगे और बाद में शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। हालांकि संजय राउत और अनिल देसाई ने किसी भी टूट की संभावना से इनकार किया है।