
पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में 'खेला' की खबरें अभी शांत भी नहीं हुई हैं कि महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में भी बड़ी उठापटक देखने को मिल रही है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) - Shiv Sena (UBT) के 9 में से 6 लोक सभा सांसदों के पार्टी छोड़ने और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें तेज़ हो गई हैं। इसी बीच उद्धव गुट के दो सांसदों ने एक बड़ी बात कह दी है।
शिवसेना (यूबीटी) में टूट की अटकलों के बीच उद्धव गुट के दो लोकसभा सांसदों ने शिंदे गुट में जाने से इनकार कर दिया है। नासिक से लोकसभा सांसद राजाभाऊ वाजे (Rajabhau Waje) और मुंबई नॉर्थईस्ट से लोकसभा सांसद संजय पाटिल (Sanjay Patil) ने शिंदे गुट के साथ जाने की अटकलों से इनकार कर दिया है। दिल्ली पहुंचकर वाजे ने कहा, "मैं उद्धव जी के साथ हूं और उनके साथ ही रहूंगा। मेरा किसी और से कोई संपर्क नहीं है। मुझे शिंदे जी का कोई फोन कॉल नहीं आया है और न ही उन्होंने मुझसे कोई संपर्क करने की कोशिश की है। मैं नाराज़ नहीं हूं और शिवसेना (यूबीटी) के साथ हूं। मैं दिल्ली में कमेटी की एक मीटिंग के लिए आया हूं।"
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसदों को तोड़ने के लिए 9 में से 6 यानी दो तिहाई सांसदों के पार्टी छोड़ने की ज़रूरत है। हालांकि अब वाजे और पाटिल के इनकार के बाद महाराष्ट्र में गेम पलटता दिख रहा है, जिससे 'ऑपरेशन टाइगर' के सफल होने की संभावना कम हो गई है।
शिवसेना (यूबीटी) के सभी लोकसभा सांसदों को कल यानी गुरुवार, 18 जून को मीटिंग के लिए दिल्ली बुलाया गया है। यह मीटिंग सुबह 11 बजे दिल्ली में संसदीय दल के कार्यालय में होगी।
इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने दावा किया है कि हर सांसद को खरीदने के लिए 50 करोड़ रुपए तय किए गए हैं जिसके लिए 15 करोड़ रूपए का एडवांस दिया जाने का ऑफर है। राउत ने यह भी कहा कि बागी नेताओं की कीमत 50,000 रुपये भी नहीं है और इनकी कीमत तो सिर्फ शिवसेना और टीएमसी के ब्रांड टैग की वजह से बढ़ी है।