SI Recruitment Updates: कोर्ट ने सफल अभ्यर्थियों को राहत देने से इंकार करते हुए टिप्पणी की कि पानी में दूध मिल जाएं तो उन्हें अलग नहीं किया जा सकता।
Supreme Court Verdict SI Recruitment: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पुलिस उपनिरीक्षक (एसआइ) भर्ती-2021 को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी है। कोर्ट ने सफल अभ्यर्थियों को राहत देने से इंकार करते हुए टिप्पणी की कि पानी में दूध मिल जाएं तो उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। हैरानी जताते हुए कहा कि हमारी अनुसंधान एजेंसियां इतनी सक्षम हैं, जो दोषी और निर्दोष को अलग कर सकती हैं, वे हत्या के मामले में तो कर नहीं पाती।
पेपरलीक में गिरोह शामिल है तो वह बेरोजगारों के साथ मजाक है। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में गडबड़ी पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि दूषित प्रक्रिया को मंजूर नहीं किया जा सकता, यह प्रकरण भर्ती रद्द करने के सभी मापदंड पूरे करता है। कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चैयरमेन संजय श्रोत्रिय के खिलाफ हाईकोर्ट की टिप्पणी हटाने से इंकार करते हुए टिप्पणी की कि आपको तो ज चल रहा था, उसकी जानकारी होनी ही चाहिए थी। वहीं केंद्रीय सेवा या पीएसयू छोडकर आने वालों को छूट दी कि राज्य सेवा की तरह उन्हें भी अपनी मूल सेवा में पुन: लेने के आदेश के लिए वे हाईकोर्ट में रिव्यु पिटिशन दायर कर सकते हैं।
जस्टिस दीपांकर दत्ता व सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने पायल शर्मा व अन्य की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को बिना नोटिस जारी किए प्रारम्भिक स्तर पर ही सोमवार को खारिज कर दिया। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के चार अप्रैल के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें बड़े पैमाने पर पेपरलीक के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर पर पुन: परीक्षा कराने के एकलपीठ के निर्णय को बरकरार रखा था।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि राजस्थान के पेपरलीक के 20 मामले आ चुके हैं। गलत तरीके से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को अलग नहीं किया जा सकता। मेडिकल से जुड़ी एक परीक्षा के मामले में तो 6 लाख अभ्यर्थी में से 44 के पकडे जाने पर ही परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।