
South India Politics: लोकसभा चुनाव 2029 के लिए दक्षिण भारत में संभावित राजनीतिक गठबंधनों और क्षेत्रीय दलों की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी और INDIA गठबंधन अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के प्रमुख क्षेत्रीय दल भविष्य के राजनीतिक समीकरणों में अहम भूमिका निभाने की तैयारी करते दिख रहे हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय के बीच हुई मुलाकात और साथ ही YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के बयानों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
तमिलनाडु सीएम जोसेफ विजय विजयवाड़ा उत्सव 2.0 में शामिल हुए थे, जहां चंद्रबाबू नायडू ने उनका भव्य स्वागत किया था। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को दक्षिण भारतीय नेताओं के बीच संबंध मजबूत करने और भविष्य के लिए विकल्प खुले रखने की एक रणनीतिक चाल के रूप में देख रहे हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा गया है कि इस मुलाकात के जरिए नायडू ने NDA नेतृत्व को संकेत दिया है कि भविष्य में वे अपनी शर्तों पर एक प्रेशर ग्रुप बना सकते हैं। इसके अलावा, युवाओं और जेन Z के समर्थन से तमिलनाडु में अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले विजय के साथ जुड़कर, नायडू ने युवा वर्ग तक पहुंचने का भी संकेत दिया है।
हालांकि, TDP संसदीय दल के नेता लावू श्री कृष्ण देवरायालु का कहना है कि इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक नहीं था, बल्कि इसका मकसद नदियों को आपस में जोड़ने जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाना था। उनके अनुसार, नदी जोड़ने की परियोजनाओं से आंध्र प्रदेश के साथ-साथ तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा को भी लाभ हो सकता है।
दूसरी तरफ, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के हालिया रुख ने अटकलों को और हवा दे दी है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 को पारित कराने में अपनी भूमिका पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया है और इसे एक गलती माना है।
इस कानून में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान है, जिसमें प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। विपक्ष का तर्क है कि पूरी प्रक्रिया सरकार के पूर्ण नियंत्रण में रहती है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर जगन के रुख में आए इस बदलाव ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के भीतर इन अटकलों को तेज कर दिया है कि 2029 से पहले कोई नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है।
तमिलनाडु में मई में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी ने DMK से नाता तोड़ लिया और जीत हासिल करने वाले गठबंधन की सरकार में शामिल हो गई। इस फैसले के झटके से DMK अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाई है। लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सदस्यों वाली DMK फिलहाल गंभीर असमंजस में है। हालांकि, परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को 2029 से लागू कराने के लिए BJP ने DMK से संपर्क किया था, लेकिन पार्टी अभी भी हिचकिचा रही है। वह BJP के साथ सीधे गठबंधन करने से होने वाले राजनीतिक नफे-नुकसान का आकलन कर रही है।
ऐसे हालात में DMK कांग्रेस और BJP से इतर अन्य दलों को साथ लाकर एक तीसरा मोर्चा बनाने की संभावना तलाश रही है। इसी रणनीति के तहत DMK नेता कनिमोझी ने हाल ही में NCP (SP) नेता शरद पवार, सुप्रिया सुले और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इसके साथ ही डीएमके सांसदों ने चुनाव आयोग की घटती साख पर चिंता जताते हुए एसआईआर को रद्द करने और बैलेट पेपर पर लौटने की मांग उठाकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।