राष्ट्रीय

CJI Surya Kant : सीजेआई बने सूर्यकांत, रोहतक से की लॉ की पढ़ाई, जानिए किन ऐतिहासिक मामलों में दिए फैसले

New CJI Surya Kant: न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आज सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश के बतौर शपथ ले ली। आइए इनके महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में जानते हैं।

3 min read
नए सीजेआई बने सूर्यकांत (Photo: IANS)

CJI Surya Kant: देश के कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। न्यायमूर्ति बीआर गवई (B. R. Gawai) का स्थान लेने वाले न्यायमूर्ति कांत लगभग 15 महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे।

ये भी पढ़ें

जस्टिस सूर्यकांत बने 53वें CJI, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

Surya Kant ने रोहतक से की लॉ की पढ़ाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पदमुक्त होंगे। उनका जन्म 10 फ़रवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने 1981 में हिसार के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से स्नातक की डिगी हासिल की। उन्होंने 1984 में रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालयसे लॉ स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

हाई कोर्ट के सबसे युवा महाअधिवक्ता बने Surya Kant

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 1984 में हिसार की जिला अदालत में वकालत शुरू की। इसके बाद 1985 में वे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत करने के लिए चंडीगढ़ चले गए। इसके बाद 2000 में वे हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने। उन्हें 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने में 'प्रथम श्रेणी प्रथम' स्थान प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त है।

जस्टिस सूर्यकांत ने आज सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश के बतौर शपथ ली।(Photo: IANS)

इन ऐतिहासिक फैसलों को देने में रहा उनका हाथ

इसके बाद उन्हें 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। अगले ही साल यानी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए। वे कई महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इन फैसलों में में राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों से निपटने में राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर हाल ही में पारित उनका फैसला भी शामिल है। वे उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून को स्थगित रखा था और निर्देश दिया था कि सरकार की समीक्षा तक इसके तहत कोई नया मामला दर्ज न किया जाए।

बिहार में SIR को लेकर दिया था ये निर्देश

मुख्य न्यायाधीश कांत ने चुनाव आयोग से बिहार में मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखे गए 65 लाख मतदाताओं का ब्योरा सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया। वह बिहार राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। हाल ही में बिहार में विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ है।

(Photo: IANS)

इन फैसलों में रही चीफ जस्टिस सूर्यकांत की भूमिका

उन्होंने उस पीठ का भी नेतृत्व किया जिसने गैरकानूनी रूप से पद से हटाई गई एक महिला सरपंच (ग्राम प्रधान) को बहाल किया और इस मामले में लैंगिक भेदभाव की निंदा की। उन्हें यह निर्देश देने का भी श्रेय दिया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएँ।

PM Modi Security उल्लंघन के मामले में कही थी बड़ी बात

प्रधान न्यायाधीश कांत उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों में "न्यायिक रूप से प्रशिक्षित दिमाग" की आवश्यकता होती है।

New Delhi: Justice Surya Kant after taking oath as the Chief Justice of India during the swearing-in ceremony at Rashtrapati Bhavan in New Delhi on Monday, November 24, 2025. (Photo: IANS)

One Rank One Pension योजना में दिया था ये फैसला

उन्होंने रक्षा बलों के लिए वन रैंक-वन पेंशन योजना को भी बरकरार रखा और इसे संवैधानिक रूप से वैध बताया तथा सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन में समानता की मांग करने वाली महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी।

AMU के बारे में भी दिया था ऐतिहासिक फैसला

मुख्य न्यायाधीश कांत उस सात न्यायाधीशों की पीठ में थे, जिन्होंने 1967 के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फैसले को खारिज कर दिया था। इसके बाद से संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था।

Pegasus Spyware की सुनवाई में भी निभाई थी भूमिका

वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई की थी और जिसने गैरकानूनी निगरानी के आरोपों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों का एक पैनल नियुक्त किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य को "राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में मुफ्त पास" नहीं मिल सकता है।

Updated on:
24 Nov 2025 02:03 pm
Published on:
24 Nov 2025 01:46 pm
Also Read
View All

अगली खबर