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चुनाव आयोग का दिल्ली हेडक्वार्टर बना वॉर रूम, जानें कैसे बंगाल चुनाव पर हर पल नजर बनाए थे मुख्य आयुक्त

West Bengal Election: दिल्ली में चुनाव आयोग के हेडक्वार्टर को पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए एक वार रूम की तरह तैयार किया गया और मतदान की रियल टाइम निगरानी की गई। इससे चुनावी पारदर्शिता को मजबूत हुई और वेबकास्टिंग और त्वरित कार्रवाई से धांधली और हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण रखा गया।

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May 01, 2026
चुनाव आयोग (File Photo)

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए चुनाव सिर्फ मतदान प्रक्रिया नहीं रहे, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी का एक नया उदाहरण भी बन गए है। चुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस बार चुनाव बिना डर और बिना धांधली के होंगे। इसी दिशा में सबसे अहम कदम रहा दिल्ली स्थित हाईटेक वार रूम का संचालन। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में इस वार रूम से हर घंटे वोटिंग प्रक्रिया की निगरानी की गई, जिससे चुनाव की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर नई मिसाल स्थापित हुई।

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कंट्रोल सेंटर में बदला मुख्यालय का सातवां फ्लोर

दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मुख्यालय का सातवां फ्लोर पूरी तरह एक कंट्रोल सेंटर में बदल दिया गया था। सुबह 6 बजे से ही यह वार रूम सक्रिय हो जाता था और 6:30 बजे तक पश्चिम बंगाल के पोलिंग बूथ की लाइव फीड स्क्रीन पर दिखाई देने लगती थी। सुबह 7 बजे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वार रूम में पहुंचते और तुरंत संवेदनशील बूथ चिन्हित किए जाते। 1400 किलोमीटर दूर बैठे अधिकारी हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे। इस सिस्टम ने यह साबित किया कि दूरी अब चुनावी गड़बड़ी के लिए कोई बहाना नहीं रह गई है।

घंटे दर घंटे निगरानी की गई

चुनाव आयोग ने एक सख्त टाइमलाइन के तहत हर घंटे समीक्षा की। सुबह 9 बजे वोटिंग ट्रेंड का विश्लेषण हुआ, 10 बजे वेबकास्ट अलर्ट देखे गए और 11 बजे रैंडम बूथ चेक बढ़ाए गए। दोपहर 12 बजे संवेदनशील क्षेत्रों का दोबारा मूल्यांकन किया गया, जबकि 1 बजे ग्राउंड रिपोर्ट को लाइव फीड से मिलाया गया। 2 बजे जरूरत पड़ने पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम भेजी गई। 3 बजे अंतिम चरण की भीड़ पर नजर रखी गई और 4 बजे वोटिंग समाप्ति से पहले सख्त निगरानी सुनिश्चित की गई।

चुनावों में 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग हुई

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य था कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत पहचानकर उसी समय रोका जाए। इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत रही 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग। हर पोलिंग बूथ के प्रवेश द्वार पर कैमरे लगाए गए थे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता बिना किसी दबाव के मतदान कर सकें। वेबकास्टिंग सिस्टम के जरिए भारत निर्वाचन आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे।

झड़प और डराने की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई

बता दें कि वेबकास्टिंग सिस्टम तकनीक केवल सुरक्षा सुनिश्चित करती है, न कि मतदाता की पसंद को उजागर करती है। दूसरे चरण के दौरान कुछ जगहों पर झड़प और डराने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन वार रूम से तुरंत कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया गया। इसके अलावा, 700 केंद्रीय बलों की तैनाती कर पोस्ट पोल हिंसा को रोकने की तैयारी भी की गई है।

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