
पश्चिम बंगाल सरकार ने 1993 के बहुचर्चित बोबाजार ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे राशिद खान की रिहाई के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस विस्फोट में कोलकाता में 69 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। राज्य सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के 5 जून के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यह मामला गंभीर आतंकी अपराध से जुड़ा है। सरकार ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की ताकि दोषी की रिहाई पर रोक लगाई जा सके। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दोषी की जेल अवधि पर सवाल किया, जिस पर राज्य ने बताया कि खान लगभग 30 वर्ष जेल में बिता चुका है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 72 वर्षीय राशिद खान को राहत देते हुए कहा था कि केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने अपने फैसले में कहा कि दोषी द्वारा भुगती गई सजा अपराध के प्रति समाज में आवश्यक डर और संदेश स्थापित करने के लिए पर्याप्त रही है। अदालत ने यह भी माना कि खान के व्यवहार, पैरोल के दौरान उसके रिकॉर्ड और सुधार संबंधी रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि उसमें सुधार हो चुका है। इसी आधार पर अदालत ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया था।
खबर अपडेट की जा रही है।