Protests over Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल खारिज होने के बाद देशभर में सियासी घमासान तेज हो गया है, जिसमें बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने हैं। महिलाओं के नेतृत्व में प्रदर्शन बढ़े हैं, वहीं कांग्रेस देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।
Women Reservation Bill: देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। लोकसभा में इस बिल से संबंधित संविधान संशोधन प्रस्ताव खारिज होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए के सहयोगी दल विपक्षी पार्टियों कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके पर लगातार हमले कर रहे हैं, वहीं देशभर में विरोध-प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं।
इन प्रदर्शनों की खास बात यह है कि हर जगह महिलाओं को नेतृत्व में आगे रखा जा रहा है। चाहे पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या सड़कों पर जनाक्रोश मार्च हर जगह महिला कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। सोमवार को पटना में एनडीए की महिला नेताओं ने जोरदार मार्च निकाला।
बीजेपी के हमलों का जवाब देने के लिए कांग्रेस ने नई रणनीति बनाई है। पार्टी ने तय किया है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। आज (मंगलवार) को कांग्रेस की प्रमुख महिला नेता 25 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का पक्ष रखेंगी।
इसके अलावा जिला स्तर पर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने निर्देश जारी किए हैं।
कांग्रेस ने अपने नेताओं से कहा है कि संसद सत्र के दौरान प्रियंका गांधी के भाषण और उनके संदेश को जनता तक पहुंचाया जाए। इससे पहले पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सभी नेताओं के साथ ऑनलाइन बैठक की, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन पर सोनिया गांधी के विचारों को भी साझा किया गया।
वहीं, संसद से बाहर अब यह मुद्दा सड़कों पर भी पहुंच चुका है। दिल्ली, लखनऊ, पटना और बेंगलुरु सहित कई शहरों में बीजेपी की महिला नेता विपक्ष के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल महिलाओं को 33% आरक्षण न मिलने पर खुश हैं। कहा कि कांग्रेस ने मेज थपथपाकर महिलाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को कुचलने का जश्न मनाया। उनके मुताबिक, वर्षों से संघर्ष कर रही महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित किया गया है।