
नीमच. मध्य प्रदेश के नीमच से महाराष्ट्र के नंदुरबार तक प्रस्तावित नई रेलवे लाइन परियोजना क्षेत्रीय विकास और रेल कनेक्टिविटी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। लगभग 380 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के चार राज्यों को जोड़ते हुए आदिवासी बहुल क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से सीधे जोडऩे का कार्य करेगी। परियोजना की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) को रेल मंत्रालय से स्वीकृति मिल चुकी है और वर्तमान में फाइनल लोकेशन सर्वे तथा डिटेल इंजीनियरिंग का कार्य प्रगति पर है।
चार राज्यों से होकर गुजरेगी रेल लाइन
प्रस्तावित रेलवे लाइन की शुरुआत नीमच (मध्य प्रदेश) के मौजूदा रेलवे जंक्शन से होगी। इसके बाद यह लाइन मध्य प्रदेश के मंदसौर क्षेत्र से गुजरते हुए राजस्थान के प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा पहुंचेगी। यहां से रेल मार्ग गुजरात के झालोद और दाहोद होते हुए महाराष्ट्र के शहादा और अंत में नंदुरबार रेलवे जंक्शन तक पहुंचेगा। मार्ग में कई छोटे नए रेलवे स्टेशन भी प्रस्तावित किए जा सकते हैं, जिनका अंतिम निर्धारण सर्वे पूरा होने के बाद किया जाएगा।
परियोजना पर करीब 7 हजार करोड़ रुपए खर्च
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 7 हजार करोड़ रुपए बताई गई है। रेलवे द्वारा किए जा रहे तकनीकी सर्वे और इंजीनियरिंग कार्य पूरे होने के बाद अंतिम लागत और रेलवे स्टेशन की संख्या तय होगी। यह रेलवे लाइन विशेष रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों को सीधा रेल संपर्क उपलब्ध कराएगी। वर्तमान में इन क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी तय करने के लिए सड? मार्ग पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। नई रेल लाइन बनने से यात्रियों के साथ-साथ किसानों, व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर के लिए एक वैकल्पिक छोटा मार्ग
नई रेल परियोजना से कृषि उत्पादों के परिवहन में आसानी होगी। इससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार को भी गति मिलेगी। बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, दाहोद और शहादा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ेंगी। निर्माण कार्य और बाद में रेलवे संचालन के दौरान स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह रेल लाइन भविष्य में दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर के लिए एक वैकल्पिक छोटा मार्ग भी बन सकती है। इससे रेल यातायात का दबाव कम होगा और मालगाडिय़ों के संचालन में भी सुविधा मिलेगी। साथ ही पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।
मुख्य विशेषताएं
कुल लंबाई लगभग 380 किलोमीटर।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ेगी
अनुमानित लागत लगभग 7 हजार करोड़ रुपए।
डीपीआर स्वीकृत, फाइनल लोकेशन सर्वे एवं डिटेल इंजीनियरिंग कार्य जारी
आदिवासी क्षेत्रों को पहली बार व्यापक रेल नेटवर्क से जोडऩे की पहल।
व्यापार, कृषि, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा।
दिल्ली-मुम्बई रेल मार्ग के लिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी विकसित होगी।
अभी सर्वे चरण में परियोजना
फिलहाल परियोजना सर्वे एवं तकनीकी अध्ययन के चरण में है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार अंतिम रूट, स्टेशन, भूमि अधिग्रहण और निर्माण संबंधी निर्णय विस्तृत सर्वे पूरा होने के बाद लिए जाएंगे। इसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू होने की दिशा में आगे की प्रक्रिया तेज होगी।
इनका कहना है
कांग्रेस के पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को लेकर फाइनल सर्वे किया जा रहा है। यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो नीमच से नंदुरबार तक का पूरा क्षेत्र रेल मानचित्र पर नई पहचान बनाएगा। चार राज्यों के लाखों लोगों को आधुनिक एवं बेहतर रेल सुविधा का लाभ मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जा सकते हैं।