नई दिल्ली

‘अगर बंगाली भाषा खतरा है तो इसे 8वीं अनुसूची से हटा दें’, प्रवासी मजदूरों की कथित प्रोफाइलिंग पर अधीर रंजन ने शाह को लिखा पत्र

Adhir Ranjan Chowdhury: अधीर रंजन चौधरी ने बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों की कथित प्रोफाइलिंग और हिरासत को लेकर अमित शाह को पत्र लिखा और भाषा के आधार पर कार्रवाई रोकने की मांग की।
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Adhir Ranjan Chowdhury
प्रवासी मजदूरों की कथित प्रोफाइलिंग पर अधीर रंजन ने शाह को लिखा पत्र, फोटो सोर्स- ANI

Adhir Ranjan letter to amit shah: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और अन्य राज्यों में बंगाली भाषी भारतीय मजदूरों की कथित तौर पर प्रोफाइलिंग, उत्पीड़न और हिरासत में लिए जाने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को बांग्लादेशी होने के संदेह में निशाना बनाया जा रहा है।

चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि मीडिया रिपोर्टों में बंगाली बोलने वाले गरीब मजदूरों, घरेलू कामगारों और महिलाओं को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए कई लोगों के पास वोटर आईडी और आधार कार्ड जैसे वैध भारतीय पहचान दस्तावेज भी मौजूद हैं।

'भाषा के आधार पर न हो नागरिकों की प्रोफाइलिंग'

कांग्रेस नेता ने कथित हिरासत और पुलिस कार्रवाई के दौरान परिवारों के अलग होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मातृभाषा के आधार पर उसकी नागरिकता पर संदेह करना संवैधानिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। चौधरी ने गृह मंत्रालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई रोकने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐसे स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि किसी की भाषा या भाषाई पृष्ठभूमि को आपराधिक प्रोफाइलिंग का आधार न बनाया जाए।

'बंगाली दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा'

अधीर रंजन चौधरी ने अपने पत्र में कहा कि बंगाली भारत में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और इसके 9.72 करोड़ से अधिक वक्ता हैं। उन्होंने कहा कि बंगाली को संविधान की आठवीं अनुसूची में आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि किसी नागरिक से केवल इसलिए देशभक्ति साबित करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि वह अपनी मातृभाषा बंगाली बोलता है।

'बंगाली खतरा है तो 8वीं अनुसूची से हटा दें'

चौधरी ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर राज्य को बंगाली भाषा ही खतरा लगती है तो संसद में प्रस्ताव लाकर इसे संविधान की आठवीं अनुसूची से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक बंगाली भाषा को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, तब तक किसी भी नागरिक को अपनी मातृभाषा बोलने के कारण अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ओडिशा, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों की पहचान और नागरिकता सत्यापन को लेकर कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और असम से आए कुछ मजदूरों को अवैध प्रवासी होने के संदेह में हिरासत में लिया गया और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कुछ मामलों में उन्हें छोड़ दिया गया।

Updated on:
09 Sept 2026 05:37 pm
Published on:
09 Sept 2026 05:37 pm