
BCI Chairman Manan Kumar Mishra: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में कुछ वकीलों ने BCI कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मिश्रा के इस्तीफे की मांग की। वहीं, मनन मिश्रा ने साफ कहा है कि वह किसी के दबाव में इस्तीफा नहीं देंगे।
मनन मिश्रा का कहना है कि उन्हें BCI चेयरमैन की जिम्मेदारी चुनाव के जरिए मिली है। उन्होंने कहा कि वह देश के करीब 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए कुछ लोगों के विरोध या सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम के कारण वह अपना पद नहीं छोड़ेंगे।
BCI कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले वकीलों ने कई मुद्दे उठाए। उनका आरोप है कि BCI के कामकाज में कई तरह की दिक्कतें हैं। वकीलों ने अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने, सभी वकीलों को बीमा सुरक्षा देने और कानून की पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों की नियमित और पारदर्शी जांच की मांग की।
कुछ वकीलों ने मनन मिश्रा के लंबे समय से BCI चेयरमैन बने रहने और वकीलों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी फीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। इन मांगों के बीच प्रदर्शनकारियों ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर दी, जिसके बाद मामला और गरमा गया।
इस विवाद की एक बड़ी वजह हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी से जुड़ा मामला भी है। यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश और यूनिवर्सिटी के चांसलर जस्टिस सूर्यकांत से जुड़े दीक्षांत समारोह का बहिष्कार किया था।
इस पर BCI की तरफ से छात्रों के वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन को लेकर एक आदेश जारी किया गया था। मनन मिश्रा ने बताया कि उन्हें छात्रों का यह कदम सही नहीं लगा, इसलिए कार्रवाई की गई।
हालांकि, यह आदेश ज्यादा देर नहीं चला और करीब 15 मिनट के अंदर इसे वापस ले लिया गया। बाद में इस फैसले को लेकर काफी सवाल उठे। मनन मिश्रा ने भी अपने फैसले पर छात्रों से माफी मांगी।
विरोध के दौरान सोशल मीडिया पर वकीलों के लिए 'लीगल कॉकरोच' जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने पर भी मनन मिश्रा भड़क गए। उन्होंने कहा कि वकील समाज का सम्मानित और पढ़ा-लिखा वर्ग हैं। उन्हें 'कॉकरोच' कहना पूरे वकील समुदाय का अपमान है।
मनन मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बंद होना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी मुद्दे पर विरोध किया जा सकता है, लेकिन पूरे पेशे को अपमानित करना सही नहीं है।
इस बीच कुछ वकील मनन मिश्रा के समर्थन में भी सामने आए हैं। अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि BCI चेयरमैन कोई नियुक्त कर्मचारी नहीं हैं। यह चुनाव से आने वाला पद है, इसलिए सिर्फ विरोध प्रदर्शन के आधार पर इस्तीफे की मांग करना सही नहीं है।
उन्होंने NALSAR मामले में भी कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन न्यायपालिका और उसके संस्थानों के प्रति सम्मान बनाए रखना भी जरूरी है।
फिलहाल BCI को लेकर विवाद जारी है। एक तरफ वकील BCI में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मनन मिश्रा के समर्थक उनके साथ खड़े हैं। वहीं मनन मिश्रा ने साफ कर दिया है कि विरोध के दबाव में वह इस्तीफा देने वाले नहीं हैं।