
गोपालगंज से राज्यसभा तक पहुंचे मानन मिश्रा, 15 साल में करीब 9 गुना बढ़ी संपत्ति। (फोटो सोर्स-IANS/@OpIndia_com)
Manan Mishra BCI Chairman: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मानन कुमार मिश्रा इन दिनों NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की ओर से BCI की भूमिका पर सवाल उठाए जाने के बाद मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ इस विवाद तक सीमित नहीं है। बिहार के गोपालगंज से वकालत शुरू करने वाले मिश्रा का सफर BCI के शीर्ष पद से होते हुए राज्यसभा तक पहुंचा है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मिश्रा पिछले करीब 12 साल से BCI की कमान संभाल रहे हैं और मार्च 2025 में वह सातवीं बार इसके चेयरमैन चुने गए। इस दौरान उनके कई फैसलों और बयानों को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं।
मामला हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कुछ छात्रों से जुड़ा है। BCI की ओर से एक निर्देश जारी किया गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इसमें छात्रों के वकील के रूप में नामांकन पर आपत्ति जताई गई थी। छात्रों ने इस फैसले का विरोध किया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पूछा कि छात्रों के विरोध के मामले में BCI को दखल देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी। पीठ ने साफ कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है। BCI को इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं थी। BCI के अधिकारियों ने बताया कि यह निर्देश मिश्रा का फैसला था और इसे जारी करने से पहले उन्होंने अपने सहयोगियों से सलाह नहीं ली थी।
मानन कुमार मिश्रा मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। उन्होंने गोपालगंज सिविल कोर्ट से वकालत शुरू की। इसके बाद पटना हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। साल 1989 में वह बिहार स्टेट बार काउंसिल से जुड़े और 2010 में BCI में बिहार के प्रतिनिधि चुने गए।
अप्रेल 2012 में पहली बार BCI चेयरमैन बने। कुछ समय के अंतराल के बाद नवंबर 2014 में उन्होंने दोबारा यह पद संभाला और तब से BCI में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई।
मिश्रा ने राजनीति में भी किस्मत आजमाई। 2009 में उन्होंने BSP के टिकट पर बिहार की वाल्मीकि नगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उन्हें करीब 76 हजार वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके अगले साल उन्होंने कांग्रेस का रुख किया और गोपालगंज की बैकुंठपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे। इसके बाद उनका ध्यान BCI पर ज्यादा रहा। BJP के प्रति उनके खुले समर्थन के बीच 2024 में पार्टी ने उन्हें बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया।
मिश्रा की संपत्ति में भी इस दौरान बड़ा इजाफा हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2009 के चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्ति करीब 1.65 करोड़ रुपए थी। 2024 के हलफनामे में यह बढ़कर करीब 14.93 करोड़ रुपए हो गई। यानी 15 साल में उनकी घोषित संपत्ति करीब नौ गुना बढ़ी। 2024 के हलफनामे में उन्होंने अपनी आय के स्रोत के तौर पर दुकान और मकान से मिलने वाला किराया और BCI से मिलने वाला बैठक भत्ता बताया था।
BCI प्रमुख के तौर पर मिश्रा के फैसलों पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। 2024 में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद BCI चेयरमैन पद पर बने रहने को लेकर भी दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी। हालांकि, अदालत ने तकनीकी आधार पर याचिका खारिज कर दी।
इसके अलावा वकीलों की हड़ताल, बार काउंसिल के अधिकार और वकालत से जुड़े नियमों को लेकर भी उनके सख्त रुख की चर्चा होती रही है।
अब NALSAR विवाद ने एक बार फिर BCI के काम करने के तरीके और मिश्रा के फैसलों को सवालों के घेरे में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बहस यही है कि छात्रों के विरोध जैसे मामलों में BCI की भूमिका कितनी होनी चाहिए और उसके अधिकारों की सीमा कहां तक है।
Updated on:
15 Aug 2026 11:26 am
Published on:
15 Aug 2026 11:26 am
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