दिल्ली सरकार ने माना है कि वर्तमान में उद्यमी बैंकों से लोन ले रहे हैं और DFC उद्यमियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा। ऐसे में उसका उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।
Delhi News दशकों से छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को ऋण सहायता देने वाली दिल्ली वित्त निगम को अब बंद कर दिया जाएगा! वित्तीय रूप से अव्यवहारिक होने और जनहित को दृष्टिगत रखते हुए दिल्ली सरकार ने इसे वाइंड-अप करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में 6 फरवरी को सरकारी गजट में अधिसूचना भी जारी कर दी गई।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट ने DFC को समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अधिसूचना में कहा गया है कि वित्तीय निगम अधिनियम की धारा 45 के अंतर्गत उपराज्यपाल ने इसे बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। DFC को MSME ( सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ) के लिए वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था लेकिन निजी बैंकों की ऋण सेवाओं के बढ़ने के कारण यह छोटे व्यापारियों को आकर्षित नहीं कर पाया। सरकार ने वाइंड-अप प्रक्रिया के लिए समापन समिति का गठन किया है जिसका नेतृत्व प्रशासनिक सचिव ( वित्त ) करेंगे। समिति में उद्योग, कानून, सेवा विभागों के सचिव और DFC के अधिकारी सदस्य हैं।
के मुताबिक, DFC के सभी संचालन बंद हो जाएंगे तथा यह केवल समापन कार्यों के लिए ही काम करेगा। इसमें बकाया वसूली, देनदारियों का निपटान, संपत्ति का निपटान या हस्तांतरण और वैधानिक प्रक्रम शामिल हैं। समिति के पास DFC की सभी संपत्तियों, रिकॉर्ड, नकदी, निवेश और शेष संसाधनों को संभालने का अधिकार होगा। इसके अलावा एकमुश्त निपटान योजना ( OTS ) कानूनी कार्रवाई और अन्य तरीकों से रिकवरी की जाएगी। लेखा-जोखा, ऑडिट तथा सभी वैधानिक कामकाज भी समिति द्वारा पूरे किए जाएंगे।
समिति कर्मचारियों के प्रबंधन, पुनर्नियोजन तथा सेवा से जुड़ी अन्य आवश्यक कार्यवाही भी करेगी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि समापन अवधि के दौरान कर्मचारियों को नियमों के अनुरूप वेतन तथा लाभ मिलते रहेंगे और उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। लंबित मुकदमें तथा प्रकरण यथावत जारी रहेंगे और समापन समिति अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से उनका निपटारा करेगी। समापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपराज्यपाल आवश्यक दिशा-निर्देशों के साथ DFC के पूर्ण विघटन की घोषणा करेंगे।