केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में बताया कि फिलहाल सरकार कोरोना टीकाकरण अभियान पर ध्यान दे रहे हैं। इसके साथ ही बूस्टर डोज की आवश्यकता पर भी विचार और समीक्षा की जा रही है, जल्द ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा।
नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका में पाया गया कोरोना के नया ओमिक्रॉन वेरिएंट दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है। भारत में अब तक इस वेरिएंट के 40 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। देश में तेजी से बढ़ते ओमिक्रॉन के मामलों को लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं। ऐसे में लोगों को कोरोना की बूस्टर डोज लगाने की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में बताया कि फिलहाल सरकार कोरोना टीकाकरण अभियान पर ध्यान दे रहे हैं। इसके साथ ही बूस्टर डोज की आवश्यकता पर भी विचार और समीक्षा की जा रही है। वैज्ञानिक भी इस बारे में रिसर्च कर रहे हैं। अगर बूस्टर डोज की जरूरत महसूस होती है तो इस पर भी विचार कर फैसला लिया जाएगा।
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कोविड-19 वैक्सीन के बूस्टर डोज से संबंधित पहलुओं पर जवाब दाखिल करने को कहा था। बता दें कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के चलते कुछ देशों में बूस्टर डोज पर बहत तेज हो गई है। वहीं कुछ देशों ने तो इस पर फैसला भी ले लिया है। ऐसे में कोर्ट ने देश में बूस्टर डोज को लेकर सरकार की रणनीति पर जवाब मांगा था।
इस बारे में जल्द ही लिया जाएगा फैसला
इसके जवाब में आज सरकार ने कहा कि नेशनल टेक्निकल इम्युनाइजेशन (एनटीएजीआई) और नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड -19 (एनईजीवीएसी) दोनों भारत में सफल कोरोनावायरस संक्रमणों के आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं। इसके साथ ही अभी देश में बड़ी आबादी को वैक्सीन लगनी बाकी हैं, इन सभी पहलुओं पर विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। जरूरत के हिसाब से इस संबंध में भी फैसला लिया जाएगा।
अभी बूस्टर डोज के लिए नहीं है कोई निर्देश
सरकार ने साफ किया कि बारे में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि NTAGI और NEGVAC दो विशेषज्ञ निकाय हैं, ये दोनों राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम का मार्गदर्शन करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि अभी कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके लोगों के लिए भी बूस्टर डोज लेने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं।
सरकार का कहना है कि अभी कोरोना के नए वेरिएंट के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। अभी हमें नहीं पता है कि यह वेरिएंट कितना घातक है और वैक्सीन इस पर कारगर है या नहीं। इन पहलुओं पर जानकारी मिलने के बाद ही हमें आगे का फैसला लेने में आसानी होगी।