नई दिल्ली

मैं हूं ना… अकेले रह रहे बुजुर्गों का सहारा बनेगा नया रोबोट

मददगार मशीन : मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया डिजाइन
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May 17, 2025
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न्यूयॉर्क. तेज रफ्तार जीवनशैली के कारण परिवारों में बुगुर्गों की देखभाल बड़ी समस्या बनी हुई है। इसे ध्यान में रखकर अमरीका के वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट रोबोट डिजाइन किया है। यह बुजुर्गों की बिस्तर से उठने और लडख़ड़ाने पर संभलने में मदद कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ डिवाइस नहीं है। यह ऐसा सहारा है, जो अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए गेमचेंजर बन सकता है। इसमें मूड डिटेक्शन, बातचीत और अकेलेपन को कम करने वाले फंक्शंस जोडऩे पर भी काम चल रहा है।मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के वैज्ञानिकों ने रोबोट का नाम ‘ई-बार’ (एलडर्ली बॉडिली असिस्टेंस रोबोट) रखा है। उनका दावा है कि इसमें लगे एडवांस सेंसर, कैमरा और फॉल-प्रिवेंशन टेक्नोलॉजी इसे कुछ सेकंड्स में एक्टिव कर देती है। बाथरूम में फिसलने से पहले या सीढिय़ां उतरते वक्त बैलेंस बिगडऩे पर यह फौरन रेस्क्यू मोड में आ जाता है। यह सिर्फ शारीरिक मदद तक सीमित नहीं है। वॉकिंग, स्ट्रेचिंग जैसी हल्की कसरत कराने से लेकर वॉयस कमांड लेने तक रोबोट बुजुर्गों के साथ खड़ा नजर आएगा।

कल भावनात्मक जरूरतों को भी समझेगा

एमआइटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘ई-बार’ भले बुजुर्गों की वैसी भावनात्मक देखभाल नहीं कर सके, जैसी उनके बच्चे करते हैं, लेकिन अकेलेपन में यह उनके लिए कई कामों में मददगार साबित हो सकता है। बुजुर्गों को सिर्फ सहारा नहीं, सुनने वाला भी चाहिए। वैज्ञानिक इस दिशा में भी काम कर रहे हैं कि रोबोट बुजुर्गों की भावनात्मक जरूरतों को भी समझ सके।

सामाजिक नवाचार की तरफ...

भारत में भी यह रोबोट सामाजिक नवाचार साबित हो सकता है। भारत में 60 साल से ज्यादा उम्र की आबादी लगातार बढ़ रही है। यह आंकड़ा 2021 में 13.8 करोड़ था। इसके 2030 तक 19 करोड़ पार पहुंचने का अनुमान है। भारतीय शहरों और गांवों में कई बुजुर्ग अकेले रहते है, क्योंकि पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में उनके बच्चे दूसरे शहर या देश में बस गए हैं।

Updated on:
17 May 2025 01:22 am
Published on:
17 May 2025 01:22 am