
नई दिल्ली। सोमवार से शुरू हुई केंद्रीकृत मुफ्त टीकाकरण नीति के परिणामस्वरूप देशभर में एक दिन में अभूतपूर्व संख्या में वैक्सीन लगाई गईं और 85 लाख लोगों को टीका लगाया गया। हालांकि, भारत में वैक्सीन निर्माताओं की संख्या को देखते हुए एक दिन में इस बड़ी संख्या की स्थिरता पर सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं। यहां पर अन्य प्रमुख मुद्दे दिए गए हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है:
अचानक कैसे बढ़ टीकों की संख्या गई?
भारत की वैक्सीन नीति में बदलाव किया गया है। पिछली कोविड-19 वैक्सीन नीति के तहत, भारत में पैदा किए गए सभी टीकों में से आधे केंद्र सरकार के पास गए और बाकी राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों में भेजे गए।
वहीं, नई नीति के तहत सरकार अब सभी निर्मित टीकों का 75 प्रतिशत हिस्सा खरीदेगी। राज्य सरकारें निर्माताओं के साथसीधे बातचीत करने के बजाय, केंद्र सरकार से अपने टीके की खुराक मुफ्त में हासिल करेंगी। हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शेष 25 प्रतिशत टीके अभी भी पहले की तरह निजी अस्पतालों द्वारा खरीद के लिए अलग रखे गए हैं।
यह नीति कैसे ज्यादा टीकाकरण में मदद करेगी?
नई नीति के तहत राज्यों को उनकी आबादी, बीमारी के स्तर, टीकाकरण की प्रगति और वैक्सीन की बर्बादी के आधार पर केंद्र सरकार से आवंटित वैक्सीन खुराक सीधे प्राप्त हो जाती है। इससे राज्यों को केंद्र सरकार को मिलने वाली कीमत पर ही वैक्सीन मिल जाती है और उन्हें ज्यादा कीमत चुकाने से राहत मिल जाती है।
क्या तेजी से बढ़ती टीकाकरण की संख्या को कायम रखा जा सकता है? क्या जल्द ही बाजार में नए टीके आएंगे?
केंद्र सरकार का लक्ष्य अगस्त से रोजाना एक करोड़ कोरोना वायरस वैक्सीन की खुराक लगाने का है और इस महीने लगभग 100 करोड़ टीकों के अग्रिम आदेश दिए जा रहे हैं ताकि अगस्त से इनके बैचों की आपूर्ति शुरू हो सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि स्वदेशी रूप से विकसित कोरोना वायरस वैक्सीन (कोवैक्सिन) का मासिक उत्पादन जुलाई-अगस्त में बढ़कर 6-7 करोड़ खुराक हो जाएगा, जो अप्रैल में एक करोड़ था।
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में तेजी लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने हैदराबाद स्थित मेसर्स बायोलॉजिकल-ई लिमिटेड के साथ 30 करोड़ कोविड-19 वैक्सीन खुराक के लिए अग्रिम व्यवस्था को अंतिम रूप दिया था।
अहमदाबाद स्थित दवा कंपनी Zydus Cadila को ZyCoV-D COVID वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया गया है। कंपनी द्वारा इस साल के अंत तक 5 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
केंद्र ने पुणे स्थित जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स को भी COVID-19 के खिलाफ वैक्सीन की खुराक उपलब्ध कराने की मंजूरी दे दी है। जेनोवा 6 करोड़ खुराक उपलब्ध कराएगी।
SII द्वारा इसके Novavax वर्जन यानी Covovax की लॉन्चिंग इस साल सितंबर में वैश्विक रूप से किए जाने की संभावना है।
सरकार भी पांच महीने की अवधि में कोविशील्ड की 75 करोड़ खुराक मिलने की उम्मीद कर रही है। वैक्सीन लॉट में रूस की स्पुतनिक वी की लगभग 15.6 करोड़ खुराक भी होंगी।
क्या यह तीसरी लहर को रोकने में मदद करेगा? इसके पीछे क्या गणित है?
पिछले महीने IIT-दिल्ली ने राष्ट्रीय राजधानी को सबसे खराब हालात के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी थी। इसमें बताया गया था कि दिल्ली में तीसरी कोरोना लहर में रोजाना 45,000 नए मामले सामने आ सकते हैं और 9,000 मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।
एक मीडिया हाउस से चर्चा में माइक्रोबायोलॉजिस्ट और वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कांग ने कहा, "आबादी का वैक्सीन कवरेज एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन भारत में संख्या इतनी बड़ी है कि केवल 30-40 प्रतिशत आबादी को कवर किया जा सकता है और ये वायरस को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है। पहले, यह सोचा गया था कि 60-70 प्रतिशत जनसंख्या कवरेज काम करेगा, लेकिन अब ऐसा लगता है, 85-90 प्रतिशत आबादी को कवर करने की जरूरत है।"
22 जून के आंकड़ों के मुताबिक, 23.9 करोड़ लोगों को आंशिक रूप से टीका लगाया गया है और 5.2 करोड़ को दोनों खुराक के साथ पूरी तरह से टीका लगाया गया है, जिसका अर्थ है कि भारत में 29.1 करोड़ लोगों को या तो पूर्ण या आंशिक रूप से टीका लगाया गया है। यानी देश को करीब 66.02 करोड़ लोगों को और अधिक टीकाकरण करना है।
कम से कम 66.02 करोड़ लोगों का मतलब है कि 66.02 करोड़ वैक्सीन खुराक आंशिक और 132.04 करोड़ वैक्सीन खुराक पूर्ण कोविड टीकाकरण के लिए। अब अगर देश प्रति दिन 75 लाख लोगों को टीका लगाने का प्रबंधन करता है, तो पूरी वयस्क आबादी को आंशिक रूप
से टीकाकरण करने में 88 दिन लगेंगे।
हालाँकि, समस्या इस तथ्य में निहित है कि भारत भी तीन महीने में पूरी वयस्क आबादी को आंशिक रूप से टीका लगाने का प्रबंधन करता है, विशेषज्ञों की राय है कि तीसरी लहर जल्द ही आ सकती है।
कब आ सकती है तीसरी लहर?
एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को चेतावनी दी कि यदि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गयाऔर भीड़ को नहीं रोका गया, तो अगले छह से आठ सप्ताह में वायरल संक्रमण की अगली लहर देश में दस्तक दे सकती है।
रॉयटर्स द्वारा हाल ही में 3-17 जून के बीच एक सर्वेक्षण किया गया था जिसमें दुनिया भर के डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, वायरोलॉजिस्ट, महामारी विज्ञानियों और प्रोफेसरों सहित 40 विशेषज्ञों से पूछा गया था कि उन्हें तीसरी लहर कब आने की उम्मीद है।
सर्वेक्षण के उत्तरदाताओं में से 85 प्रतिशत या 24 में से 21 ने कहा कि अगली लहर अक्टूबर तक आएगी, जिसमें तीन विशेषज्ञ शामिल हैं जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि महामारी अगस्त की शुरुआत में फिर से आ सकती है, जबकि अन्य 12 ने कहा कि इसके सितंबर में महामारी की वापसी की संभावना है। बाकी तीन विशेषज्ञों ने कहा कि तीसरी लहर नवंबर से
फरवरी के बीच आ सकती है।