IRS Officer Daughter Murder Delhi: दिल्ली IRS अफसर की बेटी के मर्डर केस में आरोपी राहुल मीणा का पोटेंसी टेस्ट हुआ। पुलिस ने क्राइम सीन रीक्रिएट कर जुटाए वैज्ञानिक सबूत।
Delhi Rape Case Update: दिल्ली के हाई-प्रोफाइल IRS अफसर की बेटी की हत्या के मामले में जांच एजेंसियां अब 'फुलप्रूफ' चार्जशीट तैयार करने में जुट गई हैं। आरोपी राहुल मीणा की क्रूरता के सबूत जुटाने के लिए पुलिस ने शनिवार को दो बड़े कदम उठाए- पहला, आरोपी का पोटेंसी टेस्ट (Potency Test) कराया गया और दूसरा, उसे घटनास्थल पर ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएट कराया गया।
शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे पुलिस की भारी सुरक्षा के बीच आरोपी राहुल मीणा को पीड़िता के घर ले जाया गया। यहाँ आरोपी ने परत-दर-परत उस काली रात की कहानी बयां की। उसने बताया कि वह घर की चाबी की जगह से लेकर CCTV कैमरों की लोकेशन तक सब जानता था, क्योंकि वह पहले वहां काम कर चुका था।
वारदात के रीक्रिएशन के दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि घर की अंदरूनी जानकारी होने के कारण वह बेहद आसानी से दाखिल होकर सीधे युवती के कमरे तक पहुंच गया, जहां उसने दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में आरोपी के हर मूवमेंट को बारीकी से रिकॉर्ड किया है। साथ ही, जांच टीम ने घटनास्थल और आरोपी की निशानदेही पर खून से सने कपड़े, हत्या में इस्तेमाल की गई चार्जर केबल और टेबल लैंप जैसे कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
पुलिस ने आरोपी का पोटेंसी टेस्ट कराने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है। अक्सर रेप और मर्डर के मामलों में आरोपी कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर खुद को 'शारीरिक रूप से अक्षम' या 'नपुंसक' बताने की कोशिश करते हैं ताकि सजा से बच सकें। डॉक्टरों की टीम आरोपी की शारीरिक और हार्मोनल जांच कर यह प्रमाणित करेगी कि वह शारीरिक रूप से अपराध करने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि यह टेस्ट अकेले अपराध साबित नहीं करता, लेकिन कोर्ट में यह आरोपी की उस दलील को खत्म कर देगा जिसमें वह खुद को निर्दोष या अक्षम बताने का नाटक कर सकता है।
इस केस में सबसे भयावह पहलू यह है कि आरोपी राहुल मीणा पीड़िता के परिवार का भरोसेमंद रह चुका था। उसे पता था कि घर में कब कौन होता है। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने इस जघन्य अपराध की पूरी प्लानिंग की थी। पुलिस अब वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आरोपी को अदालत से फांसी की सजा मिले।