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‘शख्स तो मिल गया, अब नीलामी की रकम भी बता दो’, राघव चड्ढा के पुराने वीडियो पर AAP विधायक का तंज

Raghav Chadha BJP Join: राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने पर आप विधायक जरनैल सिंह ने साधा निशाना। पुराना वीडियो शेयर कर पूछा- 'कितने में नीलाम हुए?'

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Raghav Chadha BJP Join

राघव चड्ढा के पुराने वीडियो पर AAP विधायक का तंज

Delhi Politics News: आम आदमी पार्टी में मची बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के भीतर से आक्रोश की लहर सामने आ रही है। राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद दिल्ली की तिलक नगर विधानसभा सीट से विधायक जरनैल सिंह ने इंस्टाग्राम पर राघव चड्ढा को उनके पुराने वादों की याद दिलाते हुए उन पर जोरदार हमला बोला है।

'वो शख्स पैदा नहीं हुआ जो मुझे खरीद ले'

जरनैल सिंह ने राघव चड्ढा का एक पुराना प्रेस कॉन्फ्रेंस वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में राघव बड़े आत्मविश्वास के साथ कह रहे हैं कि 'आज तक वो रकम नहीं बनी और वो शख्स पैदा नहीं हुआ जो राघव चड्ढा को, आम आदमी पार्टी को या अरविंद केजरीवाल को खरीद ले।'

इस वीडियो को शेयर करते हुए जरनैल सिंह ने कैप्शन में लिखा, 'चड्ढा जी, शख्स तो मालूम चल गया, अब जरा रकम भी बता दीजिए कितने में नीलाम हुए हो?' जरनैल ने एक और वीडियो पोस्ट किया जिसमें राघव भाजपा को 'गुंडों की पार्टी' कहते नजर आ रहे हैं।

क्यों टूटी केजरीवाल की सबसे भरोसेमंद जोड़ी?

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के पीछे सिद्धांतों से भटकाव को वजह बताया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इसकी पटकथा तब लिखी गई जब राघव को राज्यसभा में 'आप' के उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को नियुक्त कर दिया गया था। कद घटाए जाने से नाराज राघव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'जिस पार्टी को मैंने अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अब मूल्यों और नैतिकता से भटक गई है।'

राज्यसभा में 'आप' का वजूद संकट में

7 सांसदों के एक साथ जाने से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ताकत लगभग खत्म हो गई है। अब सदन में पार्टी के पास केवल 3 सांसद (संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और संत बलबीर सिंह) बचे हैं। पार्टी छोड़ने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं- राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल. अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी

केजरीवाल की बढ़ी टेंशन

एक तरफ पार्टी गुजरात में अपनी जमीन तलाश रही है और दूसरी तरफ पंजाब की सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती है। ऐसे समय में राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे 'रणनीतिकारों' का साथ छोड़ना केजरीवाल के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय संकट बन गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पार्टी इस टूट की भरपाई कैसे करेगी।