
राघव चड्ढा और अरविंद केजरीवाल। (फोटो- IANS)
राघव चड्ढा आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (Raghav Chadha Joins BJP) में शामिल हो गए। इसके साथ ही, आम आदमी पार्टी में बड़ी फूट हुई है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। हालांकि, राघव चड्ढा को लेकर सियासी गलियारों में कई दिनों से यह चर्चा थी कि वह बीजेपी में जाने वाले हैं, लेकिन वह अपने साथ AAP के 7 अन्य सांसदों को भी ले जाएंगे, इसकी भनक भी पार्टी व अरविंद केजरीवाल को भी नहीं लगी।
राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका भी दिया है। राघव ने पार्टी छोड़ते ही कहा कि अभी और भी हैं जो साथ आएंगे। बीजेपी जॉइन करने का काम आज शाम को होगा। भारत का संविधान यह प्रोवीजन देता है, कि अगर 2/3 से ज्यादा सांसद किसी दूसरी पार्टी में जाना चाहें तो वे ऐसा कर सकते हैं। यह अधिकार हमें भारत के संविधान ने ही दिया है।
2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का टाइम न दिया जाए। इसके बाद चड्ढा ने पार्टी व अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला था। वहीं, पार्टी की तरफ से संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और पूर्व सीएम आतिशी भी कूद गई थीं। महज 22 दिनों के भीतर अरविंद को राघव ने सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया।
दिलचस्प बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा की जगह जिसे राज्यसभा में उप नेता नियुक्त किया था। वह अशोक मित्तल भी आज यानी 24 अप्रैल को भाजपा में शामिल हो गए। अशोक मित्तल के भाजपा में शामिल होने पर आप नेता संजय सिंह ने कहा कि कुछ दिनों पहले ही मित्तल के यहां ईडी के छापे पड़े थे। उन्होंने कहा कि आप के सांसदों को तोड़ा जा रहा है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। पाठक ने कहा कि मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था कि ये स्थिति आएगी पर ये आई। 10 साल से इस पार्टी से मैं जुड़ा रहा और आज मैं AAP से अपने रास्ते अलग कर रहा हूं।
3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने उप नेता पद से हटाए जाने पर वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि मैंने संसद में जनता के मुद्दे उठाए, क्या यह अपराध है। ये मुद्दे उठाने से आम आदमी का फायदा हुआ तो AAP का क्या नुकसान हुआ? जिन लोगों ने आज पार्लियामेंट में मेरे बोलने का अधिकार मुझसे छीन लिया, मुझे खामोश कर दिया, मैं उन्हें भी कुछ कहना चाहता हूं। मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है। उन्होंने हरिवंश सिंह के राज्यसभा में दोबारा उप सभापति नामित होने पर भी खुद को उप नेता पद से हटाए जाने का जिक्र किया था।
आज राघव चड्ढा ने कहा कि मैं इस पार्टी का एक संस्थापक सदस्य था। शायद ही कोई मुझसे बेहतर इस बात को जानता होगा। हम सबने मिलकर, पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ, दिल्ली में इस पार्टी को खड़ा किया, पंजाब में इसे स्थापित किया। अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार करने का प्रयास किया। लेकिन आज, बड़े दुख, पीड़ा और शर्म के साथ मैं यह कहता हूं कि जिस पार्टी का गठन भ्रष्टाचार को खत्म करने की शपथ के साथ हुआ था, वह आज भ्रष्ट और समझौतावादी लोगों के हाथों में बुरी तरह फंस चुकी है। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ सालों से ऐसा लग रहा था कि मैं सही व्यक्ति हूं और गलत पार्टी में हूं। इसलिए मैं घोषणा करता हूं कि मैं आज (24 अप्रैल) से आम आदमी पार्टी से दूरी बना रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।
राघव चड्ढा ने कहा कि राजनीति में आने से पहले, मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) था। इस मंच पर मेरे साथ अलग-अलग क्षेत्रों के लोग थे। कुछ वैज्ञानिक थे, तो कुछ शिक्षाविद। आज, AAP छोड़ने वालों में एक विश्वस्तरीय क्रिकेटर, एक पद्मश्री विजेता और कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इन सभी लोगों ने अपना सब कुछ त्यागकर, एक भ्रष्टाचार-मुक्त भारत बनाने के संकल्प के साथ एकजुट होकर इस पार्टी की स्थापना की थी।
Updated on:
24 Apr 2026 05:32 pm
Published on:
24 Apr 2026 05:31 pm
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