नई दिल्ली

कबाड़ के नाम पर तस्करी, नेपाल में असेंबल कर भारत भेजे जाते थे हथियार; दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ से ‘सलीम पिस्टल’ को रिमांड पर लेकर खोला पूरा रैकेट

Salim Pistol Arrested Delhi Police: कबाड़ की आड़ में विदेशी हथियारों की तस्करी! दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तिहाड़ जेल से 'सलीम पिस्टल' को रिमांड पर लेकर नेपाल असेंबलिंग रूट का किया बड़ा भंडाफोड़।
2 min read
Salim Pistol Arrested Delhi Police
कबाड़ के नाम पर तस्करी, नेपाल में असेंबल कर भारत भेजे जाते थे हथियार

Arms Smuggling Nepal Border: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीमा पार से चल रहे अवैध हथियारों के एक बहुत बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने कुख्यात आर्म्स डीलर 52 वर्षीय सलीम अहमद उर्फ 'सलीम पिस्टल' को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दोबारा गिरफ्तार किया है। यह पूरा नेटवर्क बांग्लादेश में बैठकर रैकेट चला रहे गैंगस्टर शाहबाज अंसारी से जुड़ा हुआ है।

सलीम पिस्टल को पिछले साल अगस्त में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था और तब से वह तिहाड़ जेल में बंद था। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उसे तिहाड़ से लाकर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

कबाड़ (स्क्रैप) की आड़ में होती थी पुर्जों की तस्करी

क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक, यह सिंडिकेट विदेशी पिस्तौल के पुर्जों (components) को औद्योगिक कबाड़ (इंडस्ट्रियल स्क्रैप) या बड़े कार्गो कंसाइनमेंट में छिपाकर नेपाल तस्करी करता था। कस्टम चेकिंग और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए हथियारों के इन पुर्जों को असली कबाड़ के साथ मिक्स कर दिया जाता था, जिससे किसी को शक न हो।

नेपाल में असेंबलिंग और टेस्टिंग

जांच में सामने आया है कि जैसे ही कबाड़ की यह खेप नेपाल पहुंचती थी, वहां छिपी हुई सीक्रेट वर्कशॉप्स में इन पुर्जों को अलग किया जाता था। इसके बाद नेपाल में ही इन विदेशी पिस्तौलों को असेंबल (जोड़ा) किया जाता था और उनकी बकायदा टेस्टिंग की जाती थी। पूरी तरह तैयार होने के बाद इन हथियारों को गाड़ियों में छिपाकर या वैध सामान के साथ मिलाकर भारत के अलग-अलग राज्यों में गैंगस्टर और अपराधियों को सप्लाई किया जाता था।

हथियारों की तस्करी के दो मुख्य रूट

जांचकर्ताओं ने बताया कि इस साल की शुरुआत में जब शाहबाज अंसारी के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, तब नेपाल असेंबली रूट का पूरा सच सामने आया। पुलिस के अनुसार, यह सिंडिकेट भारत में हथियार भेजने के लिए मुख्य रूप से दो रास्तों का इस्तेमाल करता था। जहां पंजाब और राजस्थान के रास्ते ड्रोनों और अवैध घुसपैठ के जरिए हथियार गिराए जाते थे। खुली और पोरस (सुगम) सीमा का फायदा उठाकर कबाड़ की आड़ में हथियारों की यह बड़ी खेप भारत भेजी जाती थी। पहले की जांच में पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) से ड्रोन ड्रॉपिंग की बातें सामने आई थीं, लेकिन सलीम पिस्टल से जुड़े नए सुराग मिलने के बाद अब नेपाल रूट हथियारों की तस्करी का एक बहुत बड़ा जरिया बनकर उभरा है।

सलीम पिस्टल की भूमिका और पुलिस की आगे की तैयारी

पुलिस को शाहबाज अंसारी के नेटवर्क की जांच के दौरान कई ऐसे कम्युनिकेशन रिकॉर्ड्स और डिजिटल सबूत मिले हैं, जो सीधे सलीम पिस्टल से जुड़े हैं। सबूत बताते हैं कि सलीम इस रैकेट के 'नेपाल विंग' को संभालने में सबसे सक्रिय भूमिका निभा रहा था। वह सीमा पार के तस्करों से लगातार संपर्क में था ताकि पुर्जों और तैयार हथियारों की सप्लाई चेन बिना रुके चलती रहे।

फिलहाल पुलिस रिमांड के दौरान सलीम से पूछताछ कर नेपाल में बैठे उन गुर्गों और वर्कशॉप्स की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जो पिस्तौल असेंबल करने और उन्हें डिस्पैच करने का काम करते थे।

Updated on:
04 Jul 2026 04:23 pm
Published on:
04 Jul 2026 04:22 pm