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उमर खालिद और शरजील इमाम को मिलेगी जमानत? कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

Umar Khalid bail plea in Delhi Riots Case: दिल्ली के 2020 दंगा बड़े षड्यंत्र मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाओं पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अदालत द्वारा आज ही इस मामले में फैसला सुनाए जाने की संभावना है।
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2020 North East Delhi riots

उमर खालिद और शरजील इमाम (Photo-IANS)

Umar Khalid bail plea: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली सांप्रदायिक दंगों के मामले में मुख्य आरोपी और स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। एडिशनल सेशंस जज डॉ. सुमेध कुमार सेठी की कोर्ट आज इस मामले पर अपना अहम फैसला सुना सकती है। दोनों आरोपियों ने UAPA के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 59/2020 में नियमित जमानत के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

लाइव लॉ के मुताबिक, उमर खालिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले जमानत देने से इनकार करते समय कहा था कि उमर और शरजील एक वर्ष तक नई जमानत याचिका दाखिल नहीं करेंगे, या फिर यदि इस बीच प्रोटेक्टेड गवाहों की गवाही पूरी हो जाती है तो वे जमानत मांग सकते हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि मुकदमे में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और उनके मुवक्किल के खिलाफ केवल गवाहों के बयान हैं। उन्होंने कहा कि ना तो किसी प्रकार की बरामदगी हुई है, ना ही उमर खालिद पर हिंसा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का आरोप है। केवल अमरावती में दिए गए 17 दिन पुराने एक भाषण का वीडियो ही रिकॉर्ड पर है।

वहीं शरजील इमाम की ओर से पेश वकील तालिब मुस्तफा ने कहा कि उनके मुवक्किल लगभग छह वर्षों से जेल में हैं। मुकदमा निकट भविष्य में समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, जब इसी मामले के अन्य आरोपियों को राहत मिल चुकी है तो शरजील इमाम को भी वही लाभ मिलना चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने किया जमानत का विरोध

अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरी तरह बाध्यकारी है। दोनों आरोपियों की जमानत पर विचार केवल उसी स्थिति में किया जा सकता है जब प्रोटेक्टेड गवाहों की गवाही पूरी हो जाए या सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित एक वर्ष की अवधि समाप्त हो जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि दोनों आरोपियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका भी सर्वोच्च न्यायालय खारिज कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्ष आज भी अंतिम हैं। यदि इन्हें हाल के फैसलों के आधार पर कोई स्पष्टीकरण चाहिए था तो उन्हें फिर से सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था। ट्रायल कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कोई बदलाव नहीं कर सकती।' इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।