
राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज झा (Photo: IANS)
Manoj Jha on Uddhav Thackeray: राज्यसभा सांसद और RJD के वरिष्ठ नेता प्रो. मनोज झा ने उद्धव ठाकरे के बयान से सहमति जताई है। झा ने कहा कि लोकतंत्र में एक जागरूक वोटर किसी उम्मीदवार को एक पार्टी के टिकट पर चुनता है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उस उम्मीदवार को साम-दाम-दंड-भेद का इस्तेमाल कर जबरन दूसरी पार्टी में शामिल कर लिया जाता है। ऐसे में जनता को यह जानने का हक है कि इसमें इस्तेमाल होने वाला पैसा कहां से आ रहा है।
अपने बयान में मनोज झा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद पर जोर देते हुए कहा कि आप एक मतदाता हैं, आपने A के बजाय B को चुना, लेकिन उन्हें A की पार्टी में ले जाया गया। उन्होंने इस स्थिति को लोकतांत्रिक विश्वास और जनादेश की भावना के खिलाफ बताया। उनके अनुसार, यदि राजनीतिक दलों में इस तरह के बदलाव होते हैं, तो पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
मनोज झा ने भारतीय राजनीति में प्रचलित रणनीतिक शब्दावली साम, दाम, दंड, भेद का उल्लेख करते हुए उस पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की रणनीतियों का उपयोग होता है, तो सबसे बड़ा प्रश्न दाम यानी धन और संसाधनों के उपयोग को लेकर उठता है। उन्होंने तीखे अंदाज में पूछा - ऐसे में दाम कहां से आया यह जानने का अधिकार जनता को होना चाहिए।
मनोज झा के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उनका यह बयान न केवल उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में दल-बदल, चुनावी रणनीति और नैतिकता जैसे मुद्दों पर भी गहरी चर्चा को आगे बढ़ाता है।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए राम मंदिर दान घोटाले और कथित ऑपरेशन राम मंदिर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर से जुड़ी धनराशि के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक दलों को तोड़ने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या विपक्षी सांसदों और विधायकों को तोड़ने के लिए कोई संगठित अभियान चल रहा है, जबकि भाजपा की ओर से ऐसे आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Updated on:
04 Jul 2026 01:11 pm
Published on:
04 Jul 2026 12:22 pm
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
