
चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग वड़िंग। ( फाइल फोटो : पत्रिका)
Punjab Congress Amarinder Singh Raja Vs Charanjit Singh Channi: दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े को लेकर एक नई बात सामने आई है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाने का अपना प्लान बदल दिया है और इसके बजाय अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही इस पद पर बनाए रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब में राजनीतिक हालात का जायजा लेने के लिए बनाई गई कांग्रेस की तीन-सदस्यीय ऑब्जर्वर कमेटी ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाने की जोरदार सिफारिश की थी; हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने इस अंदरूनी सुझाव को नजरअंदाज कर दिया और वड़िंग को ही पार्टी अध्यक्ष बनाए रखा। इस फैसले के बाद पार्टी के एक गुट में बहुत नाराजगी देखी जा रही है।
गौरतलब है कि अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव वाली इस हाई-प्रोफाइल कमेटी ने पार्टी हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। कमेटी ने नेताओं को अलग-अलग ग्रुप में बांटा और उनसे अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरान 67 नेताओं से अलग अलग यह पूछा गया कि क्या पंजाब में पार्टी की लीडरशिप में बदलाव होना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोरिंडा में चन्नी के घर पर एक दर्जन से अधिक विधायक, पूर्व मंत्री और पार्टी कार्यकर्ता जमा हुए और उन्होंने खुल कर वारिंग की लीडरशिप को नकार दिया। उनका तर्क था कि जनता वारिंग का समर्थन नहीं करती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसा इसलिए किया गया ताकि दूसरे गुट नाराज न हों और लोकसभा सांसदों के बीच लॉबिंग को संभाला जा सके और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के अंदर गंभीर आपसी झगड़े से बचा जा सके। उन्हें राज्य का शीर्ष पद देने के बजाय, हाईकमान ने चन्नी को कैम्पेन कमेटी का चेयरमैन बना कर और दूसरे नेताओं को अलग-अलग चुनावी पैनलों में जिम्मेदारियां सौंप कर नेतृत्व में संतुलन बनाया गया। इस फैसले से पंजाब कांग्रेस में काफी हलचल दिखाई दी।
रिपोर्ट के अनुसार तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा समेत नाराज नेताओं ने एक कमेटी बनाई ताकि हाई कमान से फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया जा सके। उनका तर्क था कि जब तक चन्नी को राज्य अध्यक्ष नहीं बनाया जाता, तब तक कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर सकती। इन नेताओं ने चयन प्रक्रिया पर खुलेआम सवाल उठाए और आरोप लगाया कि नियुक्तियों के दौरान न तो ज़मीनी स्तर से मिली राय पर और न ही पार्टी की तीन-सदस्यीय समीक्षा कमेटी की रिपोर्ट पर ध्यान दिया गया। इनमें कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और जिलाध्यक्ष शामिल थे। उन्होंने अंबिका सोनी जैसे वरिष्ठ नेताओं से उनकी राय जानने के लिए उनके आवास पर जाकर मुलाकात भी की।
पैनल की रिपोर्ट के बाद चन्नी कैम्प को पूरा भरोसा था कि पंजाब में लीडरशिप में बदलाव होना तय है, लेकिन हाईकमान ने यथास्थिति बनाए रखते हुए राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखा और चन्नी को केवल चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। इस फैसले से हैरान एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, 'यह पूरी तरह से नाकामी है; जब आलाकमान का नेतृत्व बदलने का कोई इरादा ही नहीं था, तो नेताओं से सलाह-मशविरे का यह सारा दिखावा क्यों किया गया? इसका मतलब है कि यह पूरी कवायद महज एक ढोंग थी।'
सूत्रों के मुताबिक, इस गोपनीय चर्चा के दौरान अधिकतर नेताओं ने राजा वडिंग के कामकाज पर नाखुशी जताई,जो पिछले साढ़े चार साल से इस पद पर हैं और उन्होंने पार्टी की कमान चन्नी को सौंपने की वकालत की। समिति ने नेताओं की राय को ज्यों का त्यों अपनी रिपोर्ट में शामिल किया और चन्नी को सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया। इस प्रक्रिया से वाकिफ एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि चन्नी बहुत लोकप्रिय हैं और पंजाब के अन्य कांग्रेस नेताओं की तुलना में पार्टी के अंदर सबसे लोकप्रिय नेता हैं।
इस बीच, पंजाब कांग्रेस का एक और खेमा इस बात से सहमत नहीं है। पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता ने चन्नी के असल प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि चन्नी कांग्रेस पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और सभी विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि उनके बुलावे पर असल में कितने लोग आ रहे हैं?"
हकीकत यह है कि जब वे बैठकें बुलाते हैं, तो बमुश्किल चार-पांच विधायक ही आते हैं। उनका कहना है कि हमारा मुकाबला भगवंत मान से है, ऐसे में, अगले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि असल में कितने लोग चन्नी के साथ खड़े हैं।
बहरहाल कांग्रेस हाई कमान के इस फैसले से पंजाब कांग्रेस संगठन के अंदर नए सवाल पैदा कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि क्या पंजाब कांग्रेस के एक गुट की यह नाराजगी शांत होगी या चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन कर मुश्किल पैदा करेगी।
Updated on:
04 Jul 2026 01:03 pm
Published on:
04 Jul 2026 01:00 pm
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