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पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर, चन्नी गुट को पीसीसी अध्यक्ष पद पर वडिंग मंजूर नहीं

पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। अब कांग्रेस में बगावत के सुर सुनाई दे रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद पर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बरकरार रखने के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब में अपने समर्थकों के साथ बैठक की। इस बीच राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से हुई बैठक ने बगावत की अटकलों को बढ़ा दिया
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नई दिल्ली। पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। अब कांग्रेस में बगावत के सुर सुनाई दे रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद पर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बरकरार रखने के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब में अपने समर्थकों के साथ बैठक की। इस बीच राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से हुई बैठक ने बगावत की अटकलों को बढ़ा दिया। इससे पहले चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

दरअसल, चुनाव से पहले कलह समाप्त करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने करीब 70 नेताओं से बैठकें की। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से वन टू वन चर्चा कर उनकी राय जानी। इसके साथ ही कोषाध्यक्ष अजय माकन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी से रिपोर्ट ली गई। इसके बाद चुनाव से जुड़ी कमेटियों का गठन कर सभी वरिष्ठ नेताओं को उसमें समायोजित किया गया, लेकिन इससे नाराजगी घटने की बजाय बढ़ गई। अब खुलकर नेता अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। चन्नी के आवास पर हुई बैठक में कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक समेत कई पदाधिकारी शामिल हुए। चन्नी समर्थकों ने साफ कह दिया है कि राजा वडिंग प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मंजूर नहीं है।

इधर, इतनी बैठकों के बाद भी संतुष्ट नहीं होना सोचने वाली बात-रंधावा

वहीं गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के मामले में राजस्थान प्रभारी व सांसद रंधावा ने कहा कि मीडिया के कुछ वर्गों ने इस मुलाकात को शरारतपूर्ण राजनीतिक रंग दिया है, जिसका मैं खंडन करता हूं। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात पंजाब राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के संबंध में पहले से ही तय थी। वहीं पंजाब को लेकर रंधावा ने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होनी चाहिए थी। अगर आखिर में यही होना था, तो फिर पार्टी हाईकमान के साथ इतनी सारी बैठकों का क्या मतलब था? नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत के सवाल पर रंधावा ने कहा कि इसका जवाब अजय माकन दे सकते हैं, क्योंकि पर्यवेक्षकों की सूची में क्या था, वही बता सकते हैं।