
नई दिल्ली/कोलकाता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। एक प्रभावी विधायक बनने के लिए लगातार अध्ययन करना, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाना और संसदीय परंपराओं को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों से कहा कि जनता ने उन पर भरोसा जताया है, इसलिए उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व देना होगा।
बिरला ने यह बातें कोलकाता में लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) और पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन करते हुए कही। बिरला ने कहा कि विधायक केवल अपने विधानसभा क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए सदन में उनकी हर चर्चा और हर निर्णय का लक्ष्य जनता की समस्याओं का समाधान और राज्य का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में अधिक से अधिक समय बिताना हर विधायक की जिम्मेदारी है। यदि किसी सदस्य को किसी दिन बोलने का अवसर नहीं भी मिले, तब भी उसे सदन की कार्यवाही ध्यान से सुननी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पहली बार चुने गए और युवा विधायकों से कहा कि वे नई सोच, नवाचार और जनहित को केंद्र में रखकर काम करें। कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल विधान सभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस ने स्वागत भाषण दिया तथा राज्य सरकार के संसदीय कार्य मंत्री डॉ. शंकर घोष ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्द्रु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा की कार्यवाही हमने लाइव शुरू करवाया। यह अब तक लाइव नहीं होना और बिना मशीन के पर्ची से वोटिंग करना हमारे लिए शर्मनाक बात है। हम इन सभी व्यवस्थाओं को सुधारेंगे। लोकतंत्री जनता के लिए है, किसी पार्टी विशेष के लिए नहीं होता है।
Published on:
04 Jul 2026 11:11 am
