
CJI Surya Kant police brutality video SC; नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई का मामला देश की शीर्ष अदालत पहुंच गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने और पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने से साफ इनकार कर दिया है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सीजेपी के वकील ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बाग्ची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिका का विशेष उल्लेख (Mentioning) करते हुए मामले को गुरुवार को ही तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का पुरजोर आग्रह किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उनके पास प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता और अत्याचार के स्पष्ट वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं जिन्हें अदालत को देखना चाहिए, लेकिन पीठ ने इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया। सीजेआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अदालत मेंशनिंग स्टेज पर कोई भी वीडियो फुटेज देखने की इच्छुक नहीं है, और जब वकील ने दोबारा वीडियो सबूतों का हवाला देने की कोशिश की, तो पीठ ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि 'हमारा समय बर्बाद न करें, हमें किसी वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही हमारे पास इसे देखने का समय है।'
गौरतलब है कि सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP की ओर से संसद भवन तक निकाले गए विरोध मार्च के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए थे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद कई स्थानों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख दिल्ली पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी दागे। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों ने सवाल उठाए, जबकि पुलिस का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई तोड़फोड़ और पुलिस की कार्रवाई, दोनों के ही वीडियो सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि मामले की संवेदनशीलता और दोनों तरफ से हुए घटनाक्रमों के कारण शीर्ष अदालत ने मेंशनिंग स्टेज पर तुरंत हस्तक्षेप करने से परहेज किया है।