नई दिल्ली

वंदे मातरम् किसी पार्टी का नहीं, बार-बार चुनाव विकास में बाधक: शिवराज

वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल का गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि की वंदना है। इसका बंटवारा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बार-बार होने वाले चुनाव देश के विकास, प्रशासनिक व्यवस्था और संसाधनों पर दबाव बढ़ाते हैं
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Shivraj Singh Chauhan

नई दिल्ली/हरिद्वार। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में संत समागम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर संत समाज से जनजागरण की अपील की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल का गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि की वंदना है। इसका बंटवारा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं, बार-बार होने वाले चुनाव देश के विकास, प्रशासनिक व्यवस्था और संसाधनों पर दबाव बढ़ाते हैं।

शिवराज ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् के दो हिस्से किए गए थे। उन्होंने कहा कि अब देश को विभाजित करने वाली किसी भी सोच को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। उन्होंने संतों से अपने प्रवचनों और जनसंपर्क के माध्यम से लोगों को संपूर्ण वंदे मातरम् के महत्व से जोड़ने का आह्वान किया। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर उन्होंने कहा कि लगातार चुनावों में प्रशासन, पुलिस, शिक्षक और दूसरे सरकारी कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा चुनावी ड्यूटी में लगा रहता है। इससे विकास और जनसेवा के काम प्रभावित होते हैं। चुनावों में समय, धन और संसाधनों का भी भारी इस्तेमाल होता है।

शिवराज ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से चुनावी खर्च और संसाधनों की बचत होगी तथा सरकारों को पांच साल के कार्यकाल में विकास और जनसेवा के लिए अधिक समय मिलेगा। उन्होंने कहा कि 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव काफी हद तक एक साथ होते थे। केंद्रीय मंत्री ने संत समाज से कहा कि उनके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। यदि संत ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की जनजागरण की मशाल उठाएं तो यह विचार देश के कोने-कोने तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि राजा नहीं, जनता के विनम्र सेवक होते हैं।

Updated on:
24 Aug 2026 10:38 am
Published on:
24 Aug 2026 10:38 am