दरअसल, यह बदलाव उस समय हो रहा है जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जेन जी के राजनीतिक आंदोलनों ने पारंपरिक राजनीतिक संचार को चुनौती दी है। युवाओं के आंदोलनों में सोशल मीडिया, मीम, संगीत और पॉप-कल्चर महत्वपूर्ण माध्यम बने हैं। यही वजह है कि नए फॉर्मूले में छात्रों के सवाल, सीधे संवाद, हाथ मिलाना, सेल्फी, हाथ लहराना, शोर-शराबा और म्यूजिक को मिलाकर एक इवेंट बनाया जा रहा है। पुणे और इससे पहले कोटा, प्रयागराज व देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ के दौरान जेन जी को जोड़ने के लिए म्यूजिक और कॉन्सर्ट का इस्तेमाल भी इसी बदलाव की ओर इशारा करता है।