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सियासत का नया ‘Gen-Z मोड’: म्यूजिक-सेल्फी से शुरू, भाषण छोटा और मुद्दों पर बातचीत लंबी

Gen-Z को जोड़ने के लिए अब पारंपरिक मंच, लंबे भाषण और एकतरफा संवाद के बजाय ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है, जिसमें युवा खुद कार्यक्रम का हिस्सा महसूस करे
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Rahul Gandhi

नई दिल्ली। सियासत में नई पीढ़ी से संवाद का तरीका बदल रहा है। खासकर Gen-Z को जोड़ने के लिए अब पारंपरिक मंच, लंबे भाषण और एकतरफा संवाद के बजाय ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है, जिसमें युवा खुद कार्यक्रम का हिस्सा महसूस करे। कांग्रेस किन‘छात्रों की गूंज’ में यह बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। जहां नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए मंच पर जरूर हैं, लेकिन फोकस छात्रों की बात सुनने पर है।

दरअसल, यह बदलाव उस समय हो रहा है जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जेन जी के राजनीतिक आंदोलनों ने पारंपरिक राजनीतिक संचार को चुनौती दी है। युवाओं के आंदोलनों में सोशल मीडिया, मीम, संगीत और पॉप-कल्चर महत्वपूर्ण माध्यम बने हैं। यही वजह है कि नए फॉर्मूले में छात्रों के सवाल, सीधे संवाद, हाथ मिलाना, सेल्फी, हाथ लहराना, शोर-शराबा और म्यूजिक को मिलाकर एक इवेंट बनाया जा रहा है। पुणे और इससे पहले कोटा, प्रयागराज व देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ के दौरान जेन जी को जोड़ने के लिए म्यूजिक और कॉन्सर्ट का इस्तेमाल भी इसी बदलाव की ओर इशारा करता है।

पोडियम से ज्यादा ‘परफॉर्मेंस’

जेन जी के लिए राजनीति का पारंपरिक दृश्य मंच पर नेता, सामने भीड़ और नेता का लंबा भाषण की बजाय कार्यक्रम का पूरा माहौल ऐसा बनाने की कोशिश है, जिसमें युवा केवल सुनने वाला नहीं, बल्कि इवेंट का एक्टिव पार्टिसिपेंट हो। इसीलिए ‘छात्रों की गूंज’ में शामिल होने वालों के लिए कुर्सियां भी नहीं लगाई जा रही है। करीब तीन से चार घंटे छात्र छात्राओं के खड़े होकर जोश में नारे लगाना, गानों पर झूमना, हाथ लहराना एक अलग ही तरह का रोमांच पैदा करता दिखाई देता है। बाद में सियासी और सामाजिक सवाल और जवाब पर खुद को शामिल कर देश के मुद्दों से जुड़ा होने का इजहार भी करते दिखते हैं।

सोशल मीडिया पर बदला संवाद का तरीका

यह बदलाव केवल मैदान में नहीं है। सोशल मीडिया पर भी संवाद का तरीका बदला है। राहुल गांधी ने 6 अगस्त को इंस्टाग्राम पर छात्रों और जेन जी से सीधे कहा, आई एम हेयर टू लिसन, आस्क मी एनीथिंग। यानी मंच पर मैं बोल रहा हूं, आप सुनिए के बजाय सोशल मीडिया पर 'आप पूछिए, मैं जवाब दूंगा' का फॉर्मूला अपनाया गया।

विदेशों में भी बदलाव

  1. अमेरिका में टाउन हॉल का नया प्रयोग

अमेरिका में टाउन हॉल की पुरानी संस्कृति अब जेन जी को ध्यान में रखकर नया रूप ले रही है। ब्रिज एलायंस ने जुलाई 2026 में जेन जी टाउन हॉल प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसे संगठन ने एक नए तरह का नागरिक संवाद और लाइव ऑनलाइन टाउन हॉल बताया है। इसमें डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसद एक साथ युवाओं के सवालों पर बातचीत करते हैं। दोनों नेताओं को बराबर बोलने का समय मिलता है, जबकि सवाल युवा मॉडरेटरों की प्रक्रिया से चुने जाते हैं। यानी मंच पर नेता का एकतरफा भाषण नहीं, बल्कि युवाओं के सवालों से बातचीत की दिशा तय होती है। पहला कार्यक्रम 21 जुलाई 2026 को निर्धारित किया गया था। यह दिखाता है कि पारंपरिक टाउन हॉल भी अब युवा-केंद्रित, संवादात्मक और डिजिटल फॉर्मेट की ओर बढ़ रहा है।

  1. ब्रिटेन और यूरोप: संगीत-पॉप कल्चर से राजनीति का कनेक्शन

ब्रिटेन और यूरोप में राजनीति और पॉप-कल्चर का रिश्ता नया नहीं है। चुनावी अभियानों में संगीत, लोकप्रिय संस्कृति और युवाओं की भाषा का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। लोकप्रिय कलाकारों और गीतों का इस्तेमाल मतदाताओं, खासकर युवाओं तक पहुंचने के लिए किया गया है।