समानांतर समूह बनाकर परिजनों के खातों में डाली राशि, जिपं के तीन संविदाकर्मी दोषी
देवास. जिला पंचायत द्वारा संचालित मध्यान्ह भोजन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना के तहत बच्चों के भोजन के लिए जारी राशि को समानांतर (पेरेलल) समूह दिखाकर अपने परिजनों के खातों में ट्रांसफर किया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में करीब 23 लाख रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है। मामले में जिला पंचायत मध्यान्ह भोजन की वर्तमान प्रभारी, पूर्व प्रभारी और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को दोषी पाया गया है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर तीनों से राशि वसूली, सेवा से बर्खास्तगी और एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2021-22 से लगातार जारी था।
जांच में सामने आया कि, आरती किरावर (संविदा क्वालिटी मॉनीटर, पूर्व प्रभारी) ने 8.53 लाख रुपए, अर्पणा जैन (क्वालिटी मॉनीटर, वर्तमान मध्यान्ह भोजन प्रभारी) ने 2.48 लाख रुपए, अमन व्यास (डाटा एंट्री ऑपरेटर) ने 12.29 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा कर अपने परिजनों के बैंक खातों में राशि डलवाई। तीनों को सूचना पत्र जारी कर जवाब मांगे गए, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद बैंक खातों की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि वर्तमान प्रभारी अर्पणा जैन ने ही पहले इस फर्जीवाड़े की शिकायत की थी, लेकिन जांच में वे स्वयं भी दोषी पाई गईं। वहीं डाटा एंट्री ऑपरेटर अमन व्यास ने तो अपनी पत्नी को स्वयं सहायता समूह की सदस्य बताकर सीधे उसके खाते में भुगतान करा दिया।
शहरी क्षेत्र में मध्यान्ह भोजन का वितरण केंद्रीकृत रसोई प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जहां स्वीकृत समूह या एजेंसी द्वारा भोजन बनाकर स्कूलों तक पहुंचाया जाता है और उसी के अनुसार भुगतान होता है। जांच में सामने आया कि, वास्तविक समूह द्वारा भोजन वितरण और भुगतान नियमित रूप से हो रहा था, इसके बावजूद तीनों कर्मचारियों ने फर्जी पेरेलल समूह बनाकर अलग से भुगतान उठा लिया। दोनों क्वालिटी मॉनीटर का कार्य भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण स्तर की जांच करना था, लेकिन उन्होंने ही योजना को नुकसान पहुंचाया।