भीलवाड़ा। विकास के दावों और सरकारी फाइलों की कछुआ चाल का सबसे खराब चेहरा देखना हो, तो अजमेर मार्ग पर स्थित जोधड़ास रेलवे ओवरब्रिज इसका जीवंत प्रमाण है। 52.34 करोड़ की लागत से बनने वाला शहर का यह सबसे लंबा आरओबी आज भी ‘अधर’ में लटका है, जबकि नगर विकास न्यास अपनी लाचारी का ढोल […]
भीलवाड़ा। विकास के दावों और सरकारी फाइलों की कछुआ चाल का सबसे खराब चेहरा देखना हो, तो अजमेर मार्ग पर स्थित जोधड़ास रेलवे ओवरब्रिज इसका जीवंत प्रमाण है। 52.34 करोड़ की लागत से बनने वाला शहर का यह सबसे लंबा आरओबी आज भी 'अधर' में लटका है, जबकि नगर विकास न्यास अपनी लाचारी का ढोल पीट रहा है। https://www.dailymotion.com/video/x9z5vy8
हैरानी की बात है कि जिस प्रोजेक्ट को नवंबर 2021 में पूरा हो जाना चाहिए था, वह 6 साल बाद भी मात्र 55 फीसदी ही बन सका है। ठेकेदार के ऊंचे रसूख के आगे प्रशासन इतना लाचार है कि 21 बार नोटिस और 8 बार जुर्माना लगने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। जब भी ब्लैकलिस्ट की फाइल उठी, सत्ता के गलियारों से 'जीवनदान' मिल गया। अब सरकार ने फिर मेहरबानी दिखाते हुए जुलाई 2026 तक की नई मोहलत दे दी है।
भीलवाड़ा में जोधड़ास चौराहा आज आवागमन के लिए नरक बन चुका है। यूआईटी सचिव ललित गोयल का कहना है कि एजेंसी को 31 जुलाई 2026 तक जोधड़ासआरोबी का कार्य पूर्ण करने के लिए पाबंद किया गया है, लेकिन सवाल वही है—क्या यह नई डेडलाइन सिर्फ एक और छलावा है? जनता के टैक्स के 52 करोड़ रुपए का हिसाब आखिर कौन देगा?