महापर्व छठ
भोपाल. पूरे देश में महापर्व छठ मनाया गया। अलग अलग घाटों में भक्तों द्वारा भगवान सूर्य को सुबह और संध्या अर्घ्य अर्पित किया गया। कई लोगों के लिए इस बार का छठ काफी अलग और यादगार रहा। आस्था के पर्व छठ में जहां कई लोग महिनों पहले से टिकट ले कर घर जाने का इंतजार करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते है, जो किसी न किसी कारण से घर नही जा पाते हैं। भोपाल में ऐसे कई लोगों ने इस साल अपने परिवार से दूर रह कर छठ मनाया है। किसी का पहला छठ वीडियो कॉल पर मना तो कोई सालों से यहीं छठ मना रहा है।
मैं बिहार से हूं, पिछले 10 सालों से भोपाल में ही छठ कर रही हूं। पर्व के समय लगता ही नही की घर नही गई। पति और बच्चों के साथ बिहार संस्कृत परिषद, सरस्वती मंदिर में हर साल छठ करती हूं।नेहा कुमारी
मन्नत पूरी होने पर इस साल से छठ पूजा कर रही हूं। सासू मां से वीडियो कॉल कर पुरी विधि सीखी और व्रत उठाया। ये एक कठिन और आस्था का पर्व है। अगले साल छुट्टी मिलने पर घर से व्रत करने की मन्नत मांगती हूं।खुशी पाण्डेय
बचपन से छठ करने की इच्छा थी। शादी के बाद से ही शुरू कर दिया था। भोपाल जबसे आई हूं यहीं पर पूजा कर रही हूं। छठी मईया से मांगी हर मनोकामनाएं पूरी होती है। छठ में पूरे परिवार के साथ खुशी का माहौल रहता है।मन्नु तिवारी
घर से दूर ये मेरा पहला छठ है। हर साल छठ का उत्साह अलग होता है। इस साल छुट्टी नही मिलने की वजह से घर नही जा पाई। मां के साथ सूर्य भगवान को अर्घ्य देने जाती थी। इस साल भोपाल के घाटों पर गई थी। भोपाल में भी छठ धूम धाम से मनाया जाता है।अंशिका त्रिपाठी