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तकनीकी बनी मददगार, AI से बढ़ी आय

जीएसटी-आयकर ने टैक्स चोरी पकड़ी, हजारों नोटिस जारी

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Aug 12, 2024

जीएसटी-आयकर ने टैक्स चोरी पकड़ी, हजारों नोटिस जारी, थोकबंद ई-वे बिल कैंसिल हुए तो तकनीक ने पकड़ी टैक्स चोरी, 10 करोड़ वसूले

प्रमोद मिश्रा

जीएसटी व आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) से टैक्स चोरी पकड़ रहा है। टैक्स जमा करने वालों का डाटा एडवांस एआइसाॅफ्टवेयर व मशीन लर्निंग से जांचा तो टैक्स चोरी सामने आ गई। करीब 10 हजार नोटिस जारी हुए। जीएसटी विभाग ने 1000 ई-वे बिल कैंसिल होने पर जांच की तो गड़बड़ीपकड़ में आई और करीब 10 करोड़ टैक्स वसूला गया। आधुनिक तकनीक से जीएसटी व आयकर विभाग की आय बढ़ रही है।

आयकर विभाग एआइ आधारित साॅफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहा है। इससे गड़बड़ी करने पर सिस्टम से नोटिस जारी हो जाते हैं। जीएसटी विभाग भी मशीन लर्निंग से करोड़ों के डाटा पर नजर रख रहा है। मशीन लर्निंग एआइ का एक रूप है। पिछले दिनों करीब 1000 ई-वे बिल कैंसिल हुए तो मशीन लर्निंग की मदद ली गई। पता चला कि दो महीने पहले जहां से जीएसटी-एसजीएसटी की बड़ी रकम हासिल हुई थी, वहां गिरावट आई है। गड़बड़ीपकड़ में आते ही नोटिस जारी हुए तो करीब 10 करोड़ की वसूली हुई।

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यूपीआइ ट्रांजेक्शन से पकड़ी टैक्स चोरी

आयकर विभाग के अफसरों के मुताबिक, यूपीआइ ट्रांजेक्शन के जरिए बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी है। एआइ से पता चला कि यूपीआइ ट्रांजेक्शन से बैंक में अधिक राशि जमा हुई, जबकि आयकर रिटर्न में इसे कम बताया गया। जीएसटी डिपार्टमेंट के रिटर्न में दी गई जानकारी और उसकी तुलना में आयकर विभाग को बताई गई बिक्री की राशि में अंतर आने पर व्यापारी को नोटिस दिया तो 5 लाख रुपए का टैक्स जमा किया गया।

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शेयर व म्यूचुअल फंड की गड़बड़ी ज्यादा

एआइसाॅफ्टवेयर के जरिए डाटा एनालिसिस में शेयर व म्यूचुअल फंड की गड़बड़ी सबसे ज्यादा सामने आ रही है। कर विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर व म्यूचुअल फंड में लेन-देन की सूचना आयकर विभाग के पास होती है, लेकिन लोग उसे रिटर्न में नहीं दर्शा रहे हैं। एनालिसिस में टैक्स चोरी के नोटिस जारी हुए तो संबंधित व्यक्ति ने गलती मानकर पेनल्टी जमा की। हजारों की संख्या में ऐसी गड़बड़ीपकड़ी गई है।

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एक्सपर्ट व्यू

टेक्नोलॉजी से पकड़ी जा रही टैक्स की गड़बड़ी

टेक्नोलॉजी के उपयोग से टैक्स कलेक्शन बढ़ रहा है। कर चोरी का पता लगाना आसान हो गया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा बिग डाटा, जनरेटिव एआइ, एडवांस्ड एआइ और मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए करदाताओं के बारे में बहुत सी जानकारी बैंकों, डिजिटल वित्तीय लेनदेन, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, जीएसटी पोर्टल, पेन नंबर से प्राप्त होती है। एआइ तकनीक से गड़बड़ी सामने आने पर हजारों नोटिस जारी हो रहे हैं और लोग पेनल्टी के साथ टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।

कीर्ति जोशी, सीए

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मशीन लर्निंग से हो रहा काम

इलेक्ट्राॅनिक ट्रांजेक्शन की जो रिपोर्ट भारत सरकार से जनरेट होकर राज्योंं को मिलती है। उसका एनालिसिस मशीन लर्निंग से किया जाता है। मशीन लर्निंग से लॉजिकल परिणाम सामने आते हैं। ई-वे बिल के कैंसिल होने से गड़बड़ी पता चल जाती है। टैक्स जमा करने की प्रक्रिया के लॉजिक के आधार पर मशीन लर्निंग खुद को अपडेट कर रिपोर्ट देती है।

धनराजू एस., आयुक्त, जीएसटी

Published on:
12 Aug 2024 07:48 pm
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