medical and wellness tourism
भोपाल. हृदयम एमपी पहल से प्रदेश में मेडिकल व वेलनेस टूरिज्म के इको सिस्टम को विकसित करने का प्रयास है। यह एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित होगा जिस पर पर्यटन और वेलनेस और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के सभी स्टेक होल्डर्स समन्वयित रूप से कार्य करेंगे। यह बातें प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने कहीं। वे कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस पहल के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान आयुक्त आयुष सलोनी सिडाना, फिक्की के आयुष कमेटी के चेयरमैन और श्री श्री तत्व के प्रबंध संचालक अरविंद वर्चस्वी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।मेडिकल टूरिज्म के लिए इंटिग्रेटेड एप्रोच जरूरीमेडिकल टूरिज्म को बढ़ाने के लिए इंटिग्रेटेड एप्रोच जरूरी है। यानी मरीज को एक ही स्थान पर एलोपैथी, आयुर्वेद, युनानी व होम्योपैथी जैसी अलग अलग विधि का इलाज मिले। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इमरजेंसी केस में एलोपैथी बेहतर कार्य करती है। कई न्यूरोलॉजिकल और दीर्घकालिक रोगों में आयुर्वेद के बेहतर रिजल्ट सामने आए हैं। इसी तरह पैरालिसिस में पंचकर्म से जल्द आराम मिलता है। यह सभी सुविधाएं यदि प्रदेश में एक ही स्थान पर मिलेंगी तो इससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।- डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन
बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी
दूसरे देशों के मुकाबले भारत में सर्जरी से लेकर इलाज सस्ता है। जिनका लाभ विदेशों से आकर लोग ले भी रहे हैं। हालांकि अभी ज्यादातर मरीज दिल्ली व मुंबई जैसे बड़े शहरों तक सीमित हैं। इनको मध्यप्रदेश की तरफ डायवर्ट करने के लिए विदेशों से बेहतर कनेक्टिविटी और यहां मौजूद सुविधाओं की उन तक इंटरनेट के जरिए आसानी से जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।
- डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज
एमपी के पास है मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने के गुण
प्रदेश के पास 21 फीसदी फोरेस्ट का हिस्सा है। तमाम औषधियों गुण वाले पौधों की भरमार है। प्रमुख शहरों में मजबूत निजी से लेकर सरकारी हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर है। टाइगर स्टेट है। इन सभी को जोड़ा जाए तो प्रदेश मेडिकल टूरिज्म के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इससे प्रदेश की इकोनॉमी तेजी से बूस्ट होगी। इसके लिए राज्य सरकार पॉलिसी तैयार करेगी।
-डॉ. अजय गोयनका, फाउंडर, चिरायु ग्रुप