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हड्डी टूटने पर मांसपेशियां भी करने लगती है फ्रैक्चर की मरम्मत, वैज्ञानिकों ने खोजी शरीर की ‘एक्सपर्ट टीम’

Muscle cells bone fracture repair research: नई खोज ने फ्रैक्चर की पुरानी समझ को बदला, अब पता चला मांसपेशियों में मौजूद कुछ खास कोशिकाएं टूटे हुए स्थान तक पहुंचकर हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं में बदल सकती हैं, ये कोशिकाएं फ्रैक्चर की मरम्मत में मददगार साबित हो सकती हैं।
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Aug 17, 2026
Muscle cells bone fractures repair research
Muscle cells bone fractures repair research: हडडी टूटने और मसल्स की मदद से उसे जोड़ने पर आधारित रिसर्च से बदल सकता है इलाज का तरीका, जानें क्या कहती है रिसर्च और अभी क्यों करना होगा इंतजार? (photo: AI Creative)

Muscle cells bone fracture repair research: जब हड्डी टूटती है तो, हमारा ध्यान स्वाभाविक रूप से हड्डी, प्लास्टर और कैल्शियम पर जाता है। लेकिन शरीर के भीतर फ्रैक्चर की मरम्मत की कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है। वैज्ञानिकों ने अब मांसपेशियों के अंदर ही मौजूद ऐसी विशेष कोशिकाओं की भूमिका को सामने रखा है, जिन्हें अब तक मुख्य रूप से मांसपेशियों के पुनर्निर्माण से जोड़ा जाता था।

शोध के मुताबिक, मांसपेशियों में मौजूद Prg4+ फाइब्रो-एडिपोजेनिक प्रोजेनिटर कोशिकाएं यानी FAPs चोट लगने के बाद सक्रिय होती हैं। ये कोशिकाएं फ्रैक्चर वाली जगह तक पहुंच सकती हैं और वहां जाकर ऐसी कोशिकाओं में बदल सकती हैं जो कार्टिलेज तथा नई हड्डी बनाने में योगदान देती हैं। यह अध्ययन चूहों पर किया गया और इसके नतीजे PNAS में प्रकाशित हुए थे।

अब तक हड्डी की मरम्मत को कैसे समझा जाता था?

फ्रैक्चर भरना एक चरणबद्ध जैविक प्रक्रिया है। चोट के बाद पहले वहां खून का थक्का और सूजन बनती है। इसके बाद कोशिकाएं चोट वाली जगह पर पहुंचती हैं और एक अस्थायी संरचना यानी कॉलस बनना शुरू होता है। आगे चलकर यह कार्टिलेज और फिर नई हड्डी में बदलता है।

इस प्रक्रिया में हड्डी की बाहरी परत पेरीओस्टियम, अस्थि-मज्जा और दूसरी स्थानीय कोशिकाओं की अहम भूमिका मानी जाती रही है। लेकिन पिछले वर्षों के शोध से यह संकेत मिलता रहा है कि हड्डी के आसपास मौजूद मांसपेशियां भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। नई खोज इस समझ को एक कदम आगे ले जाती है।

मांसपेशी की कौन-सी कोशिकाएं काम आती हैं?

शोधकर्ताओं ने मांसपेशी में मौजूद Prg4+ FAP कोशिकाओं को ट्रैक किया। सामान्य परिस्थितियों में ये कोशिकाएं मांसपेशी के अंदर रहती हैं। लेकिन फ्रैक्चर के दौरान आसपास की मांसपेशियों को भी चोट लगती है। इसके बाद इन कोशिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ती है और वे फ्रैक्चर के आसपास जमा होने लगती हैं।
शोध में पाया गया कि बाद के चरणों में इन कोशिकाओं की संततियां कार्टिलेज बनाने वाली कोशिकाओं, ऑस्टियोब्लास्ट यानी हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं और ऑस्टियोसाइट यानी परिपक्व हड्डी कोशिकाओं में बदल सकती हैं।

यानी शरीर की मरम्मत व्यवस्था में मांसपेशी सिर्फ हड्डी को सहारा देने वाली संरचना नहीं रह जाती, बल्कि चोट की स्थिति में वह नई हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं का अतिरिक्त स्रोत भी बन सकती है।

सबसे दिलचस्प बात, मांसपेशी और हड्डी के बीच चलती है सेलुलर बातचीत

इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि केवल यह पता लगाना नहीं है कि मांसपेशी की कोशिकाएं फ्रैक्चर स्थल पर पहुंचती हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि ये कोशिकाएं आगे चलकर पेरीओस्टियम से जुड़ी मेसेनकाइमल प्रोजेनिटर कोशिकाओं का रूप ले सकती हैं।

जब उसी जगह दोबारा फ्रैक्चर किया गया, तो इन कोशिकाओं की संततियां फिर सक्रिय हुईं और ऑस्टियोब्लास्ट बनने में योगदान दिया। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि चोट के बाद मांसपेशी से आने वाली कुछ कोशिकाएं लंबे समय तक उस क्षेत्र की मरम्मत क्षमता का हिस्सा बनी रह सकती हैं। यही कारण है कि इस शोध को अब एक्सपर्ट्स मांसपेशी और हड्डी के बीच होने वाले जैविक संवाद भी मान रहे हैं।

अगर मांसपेशी इतनी अहम है तो हर फ्रैक्चर में यही क्यों नहीं होता?

दरअसल शोध में यह नहीं कहा गया कि हर टूटी हड्डी की मरम्मत मुख्य रूप से मांसपेशियों की कोशिकाएं करती हैं। पहले के अध्ययनों में पाया गया था कि सामान्य बंद फ्रैक्चर में मांसपेशी से आने वाली कुछ कोशिकाओं का योगदान सीमित हो सकता है, जबकि जब फ्रैक्चर के साथ आसपास के नरम ऊतक और पेरीओस्टियम को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तब मांसपेशी-व्युत्पन्न कोशिकाओं की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। यानी चोट जितनी जटिल और आसपास के ऊतकों को नुकसान जितना ज्यादा, शरीर को वैकल्पिक मरम्मत तंत्रों की जरूरत उतनी ज्यादा हो सकती है।

कुछ फ्रैक्चर देर से क्यों भरते हैं?

हर फ्रैक्चर एक जैसा नहीं होता। उम्र, मधुमेह, धूम्रपान, संक्रमण, चोट की गंभीरता और आसपास के नरम ऊतकों की स्थिति हड्डी के भरने को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से जहां मांसपेशी और अन्य नरम ऊतकों का आवरण कम होता है, वहां फ्रैक्चर की मरम्मत प्रभावित होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए नई खोज भविष्य में उन फ्रैक्चर को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है जो, सामान्य समय में नहीं भरते या नॉन-यूनियन की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

क्या इससे भविष्य में इलाज बदल सकता है?

यदि वैज्ञानिक यह समझ सकें कि चोट के बाद Prg4+ FAP कोशिकाएं कैसे सक्रिय होती हैं, फ्रैक्चर स्थल तक कैसे पहुंचती हैं और किन संकेतों के कारण वे हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं में बदलती हैं, तो भविष्य में ऐसी उपचार रणनीतियां विकसित की जा सकती हैं जो शरीर की अपनी मरम्मत क्षमता को बढ़ाएं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन मांसपेशी-आधारित प्रोजेनिटर कोशिकाओं को लक्षित करना देर से भरने वाले और न भरने वाले फ्रैक्चर के उपचार के लिए भविष्य में उपयोगी हो सकता है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऐसी कोशिकाओं पर आधारित कोई उपचार मनुष्यों के लिए तैयार है। मौजूदा प्रमुख निष्कर्ष पशु मॉडल से आए हैं।

एक और नई कड़ी

दिलचस्प बात यह है कि 2026 के एक अन्य अध्ययन ने भी मांसपेशियों में मौजूद FAP कोशिकाओं की हड्डी बनने की क्षमता को आगे जांचा। इसमें Clec3b+ FAP कोशिकाओं को फ्रैक्चर भरने के दौरान ऑस्टियोब्लास्ट में बदलते देखा गया और WNT सिग्नलिंग तथा इन कोशिकाओं की मौजूदगी को खनिजीकरण से जोड़ा गया।

इससे पता चला कि मांसपेशी-आधारित कोशिकाओं और हड्डी की मरम्मत के बीच संबंध कोई अकेला प्रयोगात्मक निष्कर्ष नहीं, बल्कि तेजी से विकसित हो रहा शोध क्षेत्र है।

आम लोगों के लिए इसका मतलब क्या है?

इस खोज का सीधा मतलब यह नहीं है कि फ्रैक्चर के बाद केवल मांसपेशियां मजबूत करने से टूटी हड्डी जल्दी जुड़ जाएगी। फ्रैक्चर के इलाज में सही स्थिति में हड्डी को रखना, पर्याप्त स्थिरता, रक्त आपूर्ति, संक्रमण से बचाव, पोषण और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पुनर्वास सभी महत्वपूर्ण हैं।

Updated on:
17 Aug 2026 10:51 am
Published on:
17 Aug 2026 10:48 am