रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या अब जंगल की क्षमता से अधिक हो गई है, जिससे टेरेटरी को लेकर संघर्ष की आशंका बढ़ रही है। बाघ टी-2407 को आरओपीटी रेंज से ट्रैंकुलाइज कर खण्डार रेंज में छोड़ा गया है, जहां उसके भाई सहित अन्य बाघ पहले से अपनी टेरेटरी बना चुके हैं।
Ranthambore Tiger Reserve के जंगल इन दिनों एक अनकही बेचैनी से गुजर रहे हैं। यहां बाघों की संख्या जंगल की क्षमता से अधिक हो चुकी है और इसी कारण उनके बीच टेरेटरी को लेकर संघर्ष की आशंका गहराने लगी है। हाल में वन विभाग ने बाघ टी-2407 को आरओपीटी रेंज से ट्रैंकुलाइज कर खण्डार रेंज में छोड़ा है। यह वही इलाका है जहां उसका जन्म हुआ था। वर्ष 2022 में पैदा हुआ यह बाघ, बाघिन टी-93 और बाघ टी-96 की संतान है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। जिस जंगल में उसने आंखें खोली थीं, वहां अब उसके ही भाई टी-2406 सहित कई युवा बाघ और बाघिन अपनी-अपनी टेरेटरी बना चुके हैं। ऐसे में अब भाइयों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर टकराव की आशंका पैदा हो गई है।
जंगल में दो ताकतवर बाघ एक ही इलाके पर दावा करते हैं, तो टकराव की आशंका बढ़ जाती है। गौरतलब है कि बाघ टी-2407 टेरेटरी की तलाश में आरओपीटी रेंज तक पहुंच गया था। वहां उसे बाघिन टी-2510 के साथ भी देखा गया था। अब टी-2407 को खण्डार रेंज में स्थानांतरित होने के बाद यह जोड़ा अलग हो सकता है।
रणथम्भौर में बाघों के बीच संघर्ष कोई नई स्थिति नहीं है। पूर्व में कई बार क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर झड़पें हो चुकी हैं। दिसंबर 2025 में बाघिन रिद्धि और उसकी बेटी के बीच संघर्ष हुआ था। अक्टूबर 2025 में रिद्धि और मीरा (टी-94) घायल हुईं। मई 2025 में जोन दो में बाघिन नूरी यानी (टी-105) और एरोहैड (टी-84) के बीच भिड़ंत हुई थी। दिसंबर 2023 में बाघ टी-120 और उसके ही भाई टी-121 के बीच संघर्ष हुआ था।
विशेषज्ञों का मानना है कि रणथम्भौर में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक होने के कारण टेरेटरी को लेकर झगड़े बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में ऐसे संघर्ष और गंभीर रूप ले सकते हैं।