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गिद्धों का ‘समर वेकेशन’, गर्मी में अंचल छोड़ गए प्रवासी

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इसी साल 20 से 22 फरवरी के बीच हुई पिछली गणना में ग्वालियर के जंगलों में गिद्धों की कुल संख्या 302 दर्ज की गई थी। लेकिन अब जैसे ही मई में सूरज ने आग उगलनी शुरू की, तो ग्रीष्मकालीन गणना में यह आंकड़ा घटकर 266 रह गया है।

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May 26, 2026
vulture

ग्वालियर. चंबल अंचल में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने न केवल इंसानों को परेशान कर रखा है, बल्कि वन्यजीवों की दुनिया में भी बड़ा बदलाव ला दिया है। तेज तापमान के कारण दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों ने अपना समर वेकेशन शुरू कर दिया है। वन विभाग द्वारा हाल ही में पूरी की गई वन्यजीवों की ग्रीष्मकालीन गणना में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि इलाके से हिमालियन, राज (किंग वल्चर) और यूरेशियन ग्रिफॉन जैसी महत्वपूर्ण प्रवासी प्रजातियों के गिद्ध ठंडे पहाड़ी इलाकों की ओर लौट गए हैं। ये विदेशी मेहमान अब दीपावली के आसपास ही ग्वालियर के आसमान में दोबारा ऊंची उड़ान भरते नजर आएंगे।

36 गिद्ध कम…

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इसी साल 20 से 22 फरवरी के बीच हुई पिछली गणना में ग्वालियर के जंगलों में गिद्धों की कुल संख्या 302 दर्ज की गई थी। लेकिन अब जैसे ही मई में सूरज ने आग उगलनी शुरू की, तो ग्रीष्मकालीन गणना में यह आंकड़ा घटकर 266 रह गया है। यानी फरवरी के मुकाबले करीब 36 से ज्यादा गिद्ध इस समय अंचल के जंगलों से गायब हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह कमी किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण नहीं, बल्कि गिद्धों के प्राकृतिक प्रवास (माइग्रेशन) की वजह से हुई है।

क्यों लौटते हैं पहाड़ों की ओर?

दरअसल, हिमालियन, राज और यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध मूल रूप से ठंडे और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों, जैसे हिमालय की वादियों और मध्य एशिया के निवासी हैं। शीतकाल (ठंड के मौसम) के दौरान जब वहाँ अत्यधिक बर्फबारी और कड़ाके की ठंड पड़ती है, तो ये भोजन और अनुकूल मौसम की तलाश में ग्वालियर के जंगलों की ओर आ जाते हैं। लेकिन जैसे ही मार्च के बाद ग्वालियर का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाता है, इन्हें यहाँ की तपन असहनीय लगती है और ये वापस अपने ठंडे मूल निवासों, यानी पहाड़ों की ओर उड़ जाते हैं।

दीपावली के आसपास लौट आएंगे

वन मंडल द्वारा साल में दो बार गिद्धों की गणना की जाती है। इस बार की ग्रीष्मकालीन गणना में 266 गिद्ध मिले हैं। इस सीजन में हिमालियन, राज और यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध पहाड़ी इलाकों में चले जाते हैं। ये प्रवासी गिद्ध वापस दीपावली के आसपास लौट आएंगे, जिससे अंचल में गिद्धों की संख्या फिर से बढ़ जाएगी।
मुकेश पटेल, डीएफओ, ग्वालियर

Updated on:
26 May 2026 08:22 pm
Published on:
26 May 2026 08:21 pm
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