
ACB team Nagaur
नागौर.आंगनबाड़ीकेन्द्रों में पोषाहार वितरण में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार से जुड़े करीब आठ साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। नागौर एसीबी चौकी की टीम ने सोमवार देर रात इस मामले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को मंगलवार को जोधपुर स्थित एसीबी कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में एसीबी ने कुल 25 जनों को आरोपी बनाया था। इनमें से छह आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अभी एक आरोपी की गिरफ्तारी शेष है।
नागौर एसीबी चौकी की एएसपी कल्पना सोलंकी ने बताया कि 31 जुलाई 2018 को महिला एवं बाल विकास विभाग की तत्कालीन उपनिदेशक उषा रानी चौधरी, ठेकेदार हरिसिंह, किशोर बंदा व योगेश दायमा को गिरफ्तार किया था, जिनके खिलाफ एसीबी ने 24 अक्टूबर 2018 चार्जशीट पेश कर दी थी। एसीबी ने आंगनबाड़ीकेन्द्रों में पोषाहार आपूर्ति एवं वितरण में अनियमितताओं और करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच शुरू की, जिसमें कुल 21 विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत सामने आने पर उन्हें आरोपी बनाया गया। जिनमें से दो आरोपियों तत्कालीन सीडीपीओ शक्तिसिंहहापावत व सुधा यादव को 2019 में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद शेष रहे 19 आरोपियों में से 18 को अब गिरफ्तार कर जेल भिजवाया है।
अब इन आरोपियों को किया गिरफ्तार
जांच में दोषी पाए जाने पर 7 साल 10 माह बाद एसीबी ने डेगाना की महिला पर्यवेक्षक संतोष चौधरी, जाना देवी और संतोष देवी, कुचामन की महिला पर्यवेक्षक हेमा अग्रवाल, गीता वर्मा, मनीषा शेखावत व अंजू शर्मा, मकराना की महिला पर्यवेक्षक राजबाला तथा परबतसर की महिला पर्यवेक्षक मूली देवी को गिरफ्तार किया हैं। साथ ही डेगाना में कार्यरत रहे संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर मंजूर पठान, एएओ राजेंद्र त्रिपाठी, कुचामन सीडीपीओ ऑफिस में कार्यरत रहे संविदा ऑपरेटर राजेंद्र प्रसाद दायमा, कुचामन सिटी के एएओ आनंद प्रकाश दायमा, नागौर सीडीपीओ ऑफिस के एलडीसी दिलीप कुमार, डेगाना के एलडीसी कमल किशोर वर्मा, कुचामन सिटी के एलडीसी विजेंद्र सिंह तथा एक निजी व्यक्ति महेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया है। मामले में नरेश दायमा नामक आरोपी की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
11 करोड़ से ज्यादा का घोटाला
एसीबी जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पोषाहार वितरण में करीब 11 करोड़ रुपए से अधिक का गबन किया। एसीबी ने पहली कार्रवाई की, उस समय महिला एवं बाल विकास विभाग डीडी उषा रानी के पास से एक ठेकेदार की ओर से दिए गए रिश्वत के 40 हजार रुपए व दूसरे ठेकेदार के पास से 51 लाख की राशि बरामद हुई थी। जांच में सामने आया कि सौ से ज्यादा फर्जी स्वयं सहायता समूह बनाकर सरकारी राशि का गबन किया गया।
Updated on:
26 May 2026 08:22 pm
Published on:
26 May 2026 08:12 pm
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