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निरीक्षण में खुली पोल, प्रदेश की 381 एमवी यूनिट्स में 100 प्रकार से भी कम दवाइयां मिली

एमपीयू में फर्जीवाड़ा : 523 यूनिट्स की जांच में कई जगह नहीं मिले पशु चिकित्सक, पेरावेट व ड्राइवर, राजस्थान पत्रिका की खबर के बाद एक्शन मोड में आया पशुपालन विभाग, अनुबंधित फर्मों से मांगा स्पष्टीकरण

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मोबाइल वेटेरीनरी यूनिट

मोबाइल वेटेरीनरी यूनिट

नागौर. प्रदेशभर में संचालित मोबाइल वेटेरीनरी यूनिट्स (एमवीयू) की व्यवस्थाओं की पोल विभागीय निरीक्षण में खुल गई। राजस्थान पत्रिका में 19 मई को खबर प्रकाशित होने के बाद पशुपालन विभाग एक्शन मोड में आया और 20 मई को प्रदेश में संचालित 536 मोबाइल वेटेरीनरी यूनिट्स का आकस्मिक निरीक्षण करने के आदेश निदेशालय की ओर से जारी किए गए। निदेशक के आदेश पर 523 एमवीय का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। जांच में कई यूनिट्स में पशु चिकित्सक, पेरावेट और ड्राइवर तक अनुपस्थित मिले, वहीं बड़ी संख्या में यूनिट्स में तय मानकों के अनुसार दवाइयां भी उपलब्ध नहीं पाई गईं। इसको लेकर विभाग के निदेशक डॉ. सुरेशचंद मीणा ने दोनों अनुबंधित फर्मों - एमएस मॉडर्न एमवीयू प्राइवेट लिमिटेड तथा कैम्प संस्था को तीन दिन के भीतर सभी यूनिट्स में निर्धारित मात्रा में दवाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित नोडल अधिकारियों से प्रमाण-पत्र लेकर जिला संयुक्त निदेशकों को भेजने को कहा गया है। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि समय पर जवाब नहीं देने या जवाब संतोषजनक नहीं होने पर निविदा शर्तों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

ये मिली कमियां

पशुपालन विभाग निदेशालय, जयपुर की ओर से जारी आदेश के अनुसार निरीक्षण में 18 यूनिट्स में पशु चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए। इसके अलावा 12 यूनिट्स में पेरावेट तथा 7 यूनिट्स में ड्राइवर कम हेल्पर नहीं मिले। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। इसके साथ निरीक्षण में दवाइयों की स्थिति भी बेहद खराब मिली। 381 मोबाइल वेटेरीनरी यूनिट्स में निविदा शर्तों के अनुसार निर्धारित 137 प्रकार की औषधियों के बजाय 100 प्रकार से भी कम दवाइयां उपलब्ध पाई गईं। विभाग के अनुसार संचालनकर्ता फर्म ‘मॉडर्न’ की ओर से संचालित 87 प्रतिशत तथा ‘कैम्प’ की ओर से संचालित 54 प्रतिशत यूनिट्स में दवाइयों की भारी कमी मिली है। विभाग ने आदेश में कहा कि स्टाफ अनुपस्थित रहने के बावजूद संबंधित वाहनों को ऑफरोड घोषित नहीं करना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। साथ ही दवाइयों की कमी को निविदा शर्तों का उल्लंघन माना गया है।

तीन बार हाजिरी के आदेश पहले दे चुके

राजस्थान पत्रिका में ‘हवा में घूम रही यूनिट, करोड़ों का बन रहा बिल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के 20 मई को विभाग ने आदेश जारी करते हुए एमवीयू के स्टाफ की दिन में तीन बार जीओ-टैग फोटो के साथ हाजिरी देने के निर्देश दिए थे। हाजिरी का समय सुबह 9 बजे, दोपहर एक बजे व 4 बजे तय किया था।