Noida Baby Selling Case: नोएडा के बिसरख में निजी अस्पताल की नर्स ने 5 दिन की बच्ची को 2.60 लाख में बेचने की कोशिश की। AHTU ने अस्पताल संचालिका को हिरासत में लिया। इस सौदेबाजी में शामिल नर्स अभी भी फरार चल रही है।
Noida Baby Selling Case: दिल्ली से सटे नोएडा में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। बिसरख थाना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में समय से पहले जन्मी (प्री-मैच्योर) एक मासूम बच्ची को लाखों रुपये में बेचने की कोशिश की गई। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने तत्परता दिखाते हुए अस्पताल की संचालिका और दो अन्य संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। इस घिनौनी साजिश का पर्दाफाश तब हुआ जब बच्ची की कीमत को लेकर खरीदार और बिचौलिए के बीच अनबन हो गई।
जानकारी के अनुसार, करीब पांच दिन पहले इस अस्पताल में एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया था, जिसे वह वहीं छोड़कर चली गई। बच्ची की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के बजाय, वहां कार्यरत एक नर्स ने उसे मोटी रकम में बेचने की योजना बना डाली। इस साजिश में नर्स ने अपने पति को भी शामिल किया, जिसने व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए बच्ची को 'गोद' देने के नाम पर खरीदारों की तलाश शुरू कर दी।
शहर की एक सोसाइटी में रहने वाले एक दंपती ने जब यह मैसेज देखा, तो उन्होंने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई। नर्स के पति और दंपती के बीच बातचीत शुरू हुई। शुरुआत में बच्ची की कीमत 3 लाख रुपये तय की गई थी, जो मोलभाव के बाद 2 लाख 60 हजार रुपये पर आकर रुकी। हालांकि, डील फाइनल होने से पहले ही पैसों या किसी अन्य बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया।
सौदा बिगड़ने पर दंपती ने पूरे मामले की जानकारी चाइल्ड और महिला हेल्पलाइन को दे दी। सूचना मिलते ही एएचटीयू की टीम सक्रिय हुई और जाल बिछाकर अस्पताल की संचालिका समेत तीन लोगों को दबोच लिया। हालांकि, मुख्य आरोपी नर्स पुलिस की भनक लगते ही फरार हो गई, जिसकी तलाश में छापेमारी जारी है।
राहत की बात यह है कि नवजात बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में रखी गई है, जिसे जल्द ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सुपुर्द किया जाएगा। वहीं, पुलिस सीसीटीवी फुटेज की मदद से उस महिला की पहचान करने में जुटी है, जिसने बच्ची को जन्म देने के बाद अस्पताल में लावारिस छोड़ दिया। इस बात की भी जांच की जा रही है कि आखिर उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आगे की प्रक्रिया के तहत बच्ची को किसी अधिकृत शिशु गृह भेजा जाएगा, जहां से उसे कानूनी तौर पर गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।